फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्रेन डेड की कगार पर पहुंची महिला को केजीएमयू में मिली नई जिंदगी, यूं बचाई जान

Sat, 23 Nov 2019 05:21 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
केजीएमयू में ऑपरेशन के बाद महिला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

केजीएमयू की टीवीयू आईसीयू टीम ने ब्रेन डेड की कगार पर पहुंची महिला का जीवन बचाने में सफलता पाई है। डॉक्टरों ने तीन दिन तक अलग-अलग दवाएं देते हुए प्रयोग किया, जो सफल रहा और मरीज की जान बच गई। अब वह पूरी तह से ठीक है। उसे वेंटिलेटर से भी हटा दिया गया है।

विज्ञापन


रायबरेली की पद्मिनी सिंह (57) के  लिवर में हाइट्रेटिक सिस्ट थी। इसके फटने से कई अंगों के काम करना बंद कर दिया था। निजी अस्पताल के जान बचने की गुंजाइश न बताने पर परिवारीजन उन्हें लेकर केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।

यहां इमरजेंसी ओटी में डॉ. संजीव कुमार ने दोनों फेफड़ों व पेट की सर्जरी की। हालांकि, इससे हालत में सुधार नहीं हुआ और ब्लड प्रेशर लगातार गिरता रहा। फिर मरीज को टीवीयू आईसीयू यूनिट में भर्ती किया गया। मरीज सांस नहीं ले पा रही थी और किडनी शॉक होने से पेशाब भी नहीं हो रही थी।
विज्ञापन


टीम ने एक बार हाथ खड़े कर दिए, लेकिन फिर मरीज के परिवारीजनों से बात कर नया प्रयोग कर मरीज की जान बचाने का प्रयास शुरू किया। पूरी टीम पल-पल की स्थिति पर नजर रखती रही। करीब 24 घंटे बाद लक्षण सकारात्मक दिखे। 48 घंटे बाद फेफड़े ने काम करना शुरू कर दिया। तीसरे दिन मरीज को होश आ गया।

विज्ञापन

यह थी चुनौती

डॉक्टरों की टीम - फोटो : अमर उजाला
ब्लड प्रेशर सबसे निम्न स्तर पर पहुंचने और सांस न ले पाने से मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी। डॉक्टरों को समझ नहीं आ रहा था कि यह संक्रमण है या एनाफायलेटिक शॉक। हालांकि, सीरम प्रोकैल्सिटोनिन से पता चला कि यह एनाफायलेटिक शॉक है।

इसमें ब्लड प्रेशर न होने और शरीर में ऑक्सीजन न जाने से ब्रेन डेड का खतरा रहता है। जांच में पता चला कि ब्रेन डेड की स्थिति नहीं है। इस पर एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विपिन सिंह ने प्रयोग करते हुए ब्लड प्रेशर बढ़ाने को एड्रीनेलिन ट्रांसफ्यूजन किया।

इसके बाद विटामिन सी के हाईडोज के साथ स्टेरायड भी दिया। इससे ब्लड प्रेशर 60-40 पर आ गया। लैक्सीस के साथ थायोपेंटोन देने से करीब 10 घंटे बाद मरीज का ब्लड प्रेशर बढ़ने लगा और फिर पेशाब आनी शुरू हुई। यह प्रक्रिया लगातार करने पर 48 घंटे बाद फेफड़ा भी काम करने लगा।

तीन दिन वेंटिलेटर पर रखने के बाद अब मरीज की  हालत में सुधार हो रहा है। टीम मेें सर्जरी विभाग से डॉ. संजीव कुमार, टीवीयू से डॉ. जीपी सिंह, डॉ. प्रवीन सिंह, डॉ. जिया, डॉ. राहुल, डॉ. प्रतिश्रूति, डॉ. नेहा, डॉ. प्रशस्ति, अन्य स्टाफ में अमरेंद्र कुशवाहा, हरेराम, सुनैना, जुबली, अभिषेक आदि थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें