ब्लड प्रेशर सबसे निम्न स्तर पर पहुंचने और सांस न ले पाने से मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी। डॉक्टरों को समझ नहीं आ रहा था कि यह संक्रमण है या एनाफायलेटिक शॉक। हालांकि, सीरम प्रोकैल्सिटोनिन से पता चला कि यह एनाफायलेटिक शॉक है।
इसमें ब्लड प्रेशर न होने और शरीर में ऑक्सीजन न जाने से ब्रेन डेड का खतरा रहता है। जांच में पता चला कि ब्रेन डेड की स्थिति नहीं है। इस पर एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विपिन सिंह ने प्रयोग करते हुए ब्लड प्रेशर बढ़ाने को एड्रीनेलिन ट्रांसफ्यूजन किया।
इसके बाद विटामिन सी के हाईडोज के साथ स्टेरायड भी दिया। इससे ब्लड प्रेशर 60-40 पर आ गया। लैक्सीस के साथ थायोपेंटोन देने से करीब 10 घंटे बाद मरीज का ब्लड प्रेशर बढ़ने लगा और फिर पेशाब आनी शुरू हुई। यह प्रक्रिया लगातार करने पर 48 घंटे बाद फेफड़ा भी काम करने लगा।
तीन दिन वेंटिलेटर पर रखने के बाद अब मरीज की हालत में सुधार हो रहा है। टीम मेें सर्जरी विभाग से डॉ. संजीव कुमार, टीवीयू से डॉ. जीपी सिंह, डॉ. प्रवीन सिंह, डॉ. जिया, डॉ. राहुल, डॉ. प्रतिश्रूति, डॉ. नेहा, डॉ. प्रशस्ति, अन्य स्टाफ में अमरेंद्र कुशवाहा, हरेराम, सुनैना, जुबली, अभिषेक आदि थे।