धीरेंद्र प्रताप सिंह की फाइल फोटो।
लखनऊ। महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या कुछ अधिकारियों की पोस्टिंग के लिए दी गई रकम के विवाद में की गई थी। आरोपी रवि कुमार तिवारी ने पुलिस रिमांड में यह दावा किया है। हालांकि, पुलिस को उसकी कहानी पर भरोसा नहीं है। पुलिस को आशंका है कि आरोपी पूछताछ में लगातार गुमराह कर रहा है और संभव है कि किसी को बचाने के लिए नई कहानी गढ़ रहा हो। 24 घंटे की रिमांड अवधि पूरी होने पर पुलिस बुधवार सुबह करीब 10 बजे रवि को जेल में दाखिल करेगी।
मंगलवार सुबह 10 बजे जेल से बाहर आते ही पुलिस ने उससे घटनास्थल तक का रूट मैप समझा। इसके बाद हत्या में इस्तेमाल असलहे की बरामदगी के लिए उसे कई स्थानों पर ले जाया गया। रवि ने बताया कि किसान पथ पर चढ़ते समय उसने असलहा इंदिरा नहर में फेंक दिया था। पुलिस को आशंका है कि आरोपी असलहे की बरामदगी को लेकर भी गुमराह कर रहा है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि असलहा वास्तव में नहर में फेंका गया था या कहीं और छिपाया गया है।
पोस्टिंग के लिए धीरेंद्र को दी थी बड़ी रकम
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में रवि ने दावा किया कि उसने दो-तीन अधिकारियों की पोस्टिंग के लिए धीरेंद्र को रकम दी थी। आरोप है कि धीरेंद्र ने न तो पोस्टिंग कराई और न रुपये लौटाए। संबंधित अधिकारी उससे लगातार रकम मांग रहे थे। कई बार रुपये वापस मांगने के दौरान धीरेंद्र से उसका विवाद हुआ। इसी से नाराज होकर उसने हत्या कर दी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पोस्टिंग के नाम पर वास्तव में रकम दी गई थी या नहीं।
अकेले की हत्या, शव ठिकाने लगाने में ओमकार को साथ लिया
रवि ने दावा किया कि धीरेंद्र की हत्या उसने अकेले की थी। इसके बाद शव को फॉर्च्यूनर से शहीद पथ के रास्ते कमता ले गया। वहां ओमकार को साथ लिया और शव ठिकाने लगाने के लिए बाराबंकी की ओर गए। मौका नहीं मिलने पर दोनों लौट आए। बाद में किसान पथ के रास्ते दुबग्गा क्षेत्र में शव फेंक दिया। रवि ने शूटरों के शामिल होने से इन्कार किया है।
धीरेंद्र प्रताप सिंह की फाइल फोटो।