च्यवनप्राश के आगे सोना या चांदी जोड़कर ग्राहकों को बेवकूफ नहीं बनाया जा सकेगा। इसके अलावा कोई भी निर्माता कंपनी अपना ब्रांड को भी च्यवनप्राश के आगे जोड़कर नहीं बेच सकेगी।
आयुष मंत्रालय,भारत सरकार ने इसे प्रतिबंधित करने की तैयारी कर ली है। इस प्रतिबंध के बाद केवल च्यवनप्राश के नाम से ही उत्पाद को बेचा जा सकेगा।
अभी पूरे भारत में निर्माता कंपनियां ऐसा धड़ल्ले से कर रही हैं।
शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हर्बल दवा पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में मौजूद आयुर्वेद फार्माकोपिया कमेटी, भारत सरकार के चेयरमैन और बीएचयू में आयुर्वेद फैकल्टी के प्रोफेसर वीके जोशी ने बताया कि च्यवनप्राश की मार्केटिंग के समय कंपनियां मनमानी कर रही हैं।
इसके लिए च्यवनप्राश की क्षमता को और अधिक बढ़ाने का दावा किया जाता है। कंपनियां इसे सोना-चांदी च्यवनप्राश या फिर खुद के ब्रांडनेम के साथ जोड़कर बेचती हैं। ऐसे कई उदाहरण बाजार में हैं।