जनता एक्सप्रेस ट्रेन के हादसों का कारण जानने के लिए बछरावां पहुची डीआरएम की टीम ने शनिवार को मौके का मुआयना किया और ब्रेक सिस्टम की स्थिति जानी।
टीम ने इंजन के पिछले पहिये के ऊपर लगे इमरजेंसी ब्रेक लॉक का भी मुआयना किया, ताकि पता लगाया जा सके कि ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक का इस्तेमाल किया भी था या नहीं।
टीम में शामिल एक अधिकारी ने दबी जुबान में इतना जरूर बताया कि ट्रेन की गति को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल होने वाली चार तरह की ब्रेक प्रणाली का एक साथ काम न करना समझ से परे है। यह पहला हादसा है जिसमें ब्रेक प्रणाली एक साथ काम नहीं कर रही थी।
वैक्यूम रिलीज किया या नहीं, इसकी भी होगी जांच
ट्रेन के गार्ड ने वैक्यूम रिलीज किया या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी। हालांकि पहली नजर में यह बात सामने आ रही है कि गार्ड ने पिछले हिस्से में वैक्यूम को रिलीज करने का प्रयास किया था। हालांकि उससे भी ट्रेन की गति पर कोई फर्क नहीं पड़ सका।
वैक्यूम दो भागों में बंटता नजर आ रहा है। एक पीछे की बोगी से पहली बोगी तक और दूसरा केवल इंजन तक सीमित दिख रहा है।
इससे यह बात तो सामने आ रही है कि इंजन से अंतिम बोगी तक एयर ब्रेक वाली प्रणाली में कुछ तकनीकी गड़बड़ी जरूर है। अब यह गड़बड़ी किस तरह की है, इसका पता स्पीडोमीटर और ड्राइवर के बयान के बाद पता चला सकेगा।
बंद कमरे में दर्ज हुए हादसे से जुड़े कर्मचारियों के बयान
हादसे से जुड़े सुबूत जुटाने के लिए रेलवे ने अपनी जांच शुरू कर दी है। शनिवार को मुख्य संरक्षा अधिकारी नवीन शुक्ल के सामने एक बंद कमरे में बछरावां स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक के अलावा सिग्नल, ऑपरेटिंग और इंजीनियरिंग सहित कई अनुभागों के कर्मचारियों ने अपने बयान दर्ज कराए।
शुक्ल ने बछरावां के स्टेशन अधीक्षक एसबी दुबे से पूछताछ की। स्टेशन अधीक्षक ने जनता एक्सप्रेस के बछरावां पहुंचने का समय, उसकी लूप लाइन पोजीशन, आउटर सिग्नल का रिकॉर्ड सहित कई साक्ष्य पेश किए।
जनता एक्सप्रेस को लेकर कंट्रोल रूम से जुड़ी बातचीत और उसे लूप लाइन पर डालने से जुड़े दस्तावेजों की जांच भी की। हालांकि जनता एक्सप्रेस के ड्राइवर पीएन मिश्र, सुबोध प्रसाद और गार्ड से इस मामले में पूछताछ नहीं हो सकी।
संरक्षा आयुक्त की जांच 23 व 24 को
जनता एक्सप्रेस हादसे की जांच दक्षिण मध्य परिक्षेत्र के रेल संरक्षा आयुक्त डीके सिंह करेंगे। वे घटनास्थल का जल्द ही दौरा करेंगे। इसके बाद वे हजरतगंज स्थित डीआरएम मुख्यालय में 23 और 24 मार्च को सुबह 10 से शाम छह बजे तक इस हादसे से जुड़े बयानों की जांचकरेंगे। इसके बाद ही जांच की दिशा तय होगी।