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नहीं बिकेंगे चायनीज पटाखे, बेचते हुए पकड़े गए तो होगी सख्त कार्रवाई

Sat, 06 Oct 2018 04:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : डेमो
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दशहरा व दीपावली पर आतिशबाजी व तेज आवाज पटाखे से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त इंतजाम होंगे। शहर में लगने वाले फुटकर पटाखा बाजारों में दुकान लगाने के लिए दिए जाने वाले अस्थायी लाइसेंस की संख्या 50 फीसदी तक घटाई जाएगी। साथ ही विदेशी व चाइना ब्रांड पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। इसे बेचते पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। 
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शासन स्तर से गृह विभाग ने पटाखों व आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए दशहरा व दीपावली पर थोक व फुटकर पटाखा बिक्री के नए मानक तैयार कर जिला प्रशासन को भेजे हैं। इसमें फुटकर पटाखा बिक्री के लिए गत वर्ष जारी हुए अस्थायी पटाखा लाइसेंसों की संख्या को 50 फीसदी तक कम कर दिया गया है।

साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि किसी भी स्थिति में विदेशों से आयातित आतिशबाजी व तेज आवाज पटाखों की बिक्री के लिए लाइसेंस अथवा अनुमति जारी न की जाए। अगर कोई कारोबारी चोरी छिपे विदेशी अथवा चायनीज पटाखों की बिक्री करता मिले तो तत्काल उसका बिक्री लाइसेंस निरस्त कर आतिशबाजी स्टाक जब्त कर लिया जाए। साथ ही कड़ी कार्रवाई की जाए। 
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प्रदूषण रोकने को तेज अवाज करने वाले पटाखों व अधिक धुंआ फैलाने वाली आतिशबाजी की बिक्री को भी सख्ती के साथ प्रतिबंधित किया जाएगा। इससे वायु व ध्वनि प्रदूषण के असमान्य स्तर तक बढ़ने वाले ग्राफ को रोकने में प्रभावी मदद मिलेगी। प्रभारी अधिकारी व एडीएम सिटी पश्चिम संतोष कुमार वैश्य ने बताया कि शासन स्तर से जारी दिशा निर्देश में पटाखों की बिक्री कम करने को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराने का भी निर्देश दिया गया है।
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निर्माण सामग्री से तय होगी पटाखों की गुणवत्ता

- फोटो : डेमो
साइलेंस जोन में चिह्नित स्कूल, अस्पताल, न्यायालय, धार्मिक स्थल, चिड़ियाघर, बाल गृह के 10 मीटर के दायरे में किसी भी तरह से पटाखा चलाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने बताया कि प्रशासन सिर्फ उन्हीं पटाखों की बिक्री की अनुमति जारी करेगा जिनका निर्माण पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गेनाइजेशन (पीएफएसओ) द्वारा तय मानक के मुताबिक एल्युमिनियम, सल्फर, पोटैशियम व वेरियम से किया गया होगा। एंटीमनी, लिथियम मर्करी, आर्सेनिक, लेड और स्ट्रान्सियम क्रोमेड से बनी आतिशबाजी व पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तय मानकों के तहत पटाखों की आवाज का शोर शहरी क्षेत्र में सुबह छह से रात दस बजे तक 55 डेसिबल और रात दस बजे से सुबह छह बजे तक 45 डेसिबल रहना चाहिए। इससे ज्यादा ध्वनि या शोर प्रदूषण की श्रेणी में आकर बेचैनी पैदा करने लगता है।

95 डेसिबल की आवाज कान की सुनने की क्षमता को प्रभावित करती है और 110 डेसिबल से ज्यादा आवाज हो तो कान का पर्दा फटने की आशंका भी कई गुना तक बढ़ जाती है। प्रतिबंधित श्रेणी के बाजार में बिकने वाले अधिकतर पटाखे की ध्वनि क्षमता 120 डेसिबल या उससे ज्यादा होती है।
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