नाका के होलसेल कारोबारी नीलेश अग्रवाल बताते हैं कि राजधानी व आसपास के जिलों के लोग चीन में बने खिलौनों पर 600 करोड़ और सजावटी आइटम पर सालाना 1200 करोड़ खर्च करते हैं। बच्चों के जितने भी खिलौने मार्केट में सजे हैं वह सब चीन में ही तैयार होते हैं। घरों की साज सज्जा के लिए खरीदे जाने वाले आइटम, लाइट, लैंप, झूमर, फाउंटेन, शो पीस, फर्नीचर सब में ज्यादातर चीन के होते हैं।
कपड़ा -- 30
सजावटी आइटम -- 80
इलेक्ट्रिकल -- 75
इलेक्ट्रॉनिक -- 70
मोबाइल -- 70
खिलौने -- 80
एलईडी टीवी -- 40
कॉस्मेटिक्स -- 40
ट्रेड -- रुपये(करोड़ में)
कपड़ा -- 1500
सजावटी आइटम -- 1200
इलेक्ट्रिकल्स -- 1000
कास्मेटिक -- 1000
इलेक्ट्रॉनिक्स -- 500
मोबाइल्स -- 650
खिलौने -- 600
एलईडी टीवी -- 300
लैपटॉप, कंप्यूटर -- 250
कुल -- 7000
नोट : आंकड़ों का स्रोत ट्रेड कारोबारी
नाका हिंडोला व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतपाल सिंह मीत ने बताया कि राजधानी में हर महीने 10000 एलईडी टीवी बिकते हैं। इनमें 6000 तो ब्रांडेड कंपनियों के, जबकि 4000 चीन में तैयार किए होते हैं। इसके अतिरिक्त चीन में बनाए गए माइक, स्पीकर, और कई तरह की एसेसरीज भी खूब बिकती हैं, जिनका लखनऊ में सालाना 300 करोड़ का कारोबार होता है।
सस्ते मोबाइल के बाजार पर चीन का कब्जा
लखनऊ मोबाइल एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज जोहर बताते हैं कि जितने भी सस्ते मोबाइल बिक रहे हैं वह चीन के हैं। मोबाइल की 90 फीसदी एसेसरीज भी चीन से ही सप्लाई हो रही है। चीनी मोबाइल और एसेसरीज की राजधानी के बाजार में 70 फीसदी हिस्सेदारी है।
चीन में बने हैं प्रॉसेस हाउस
लखनऊ कपड़ा व्यापार मंडल के अध्यक्ष अशोक मोतियानी बताते हैं कि चीन में भारतीय उद्यमियों ने कपड़े के प्रॉसेस हाउस बना रखे हैं। इसकी वजह कपड़े की कम लागत में उसकी बेहतरीन फिनिशिंग होना है।
लखनऊ में सालाना जितना कपड़ा बिकता है, उसमें 30 फीसदी चीन का तैयार हुआ शामिल होता है, जो लगभग सालाना 1200 करोड़ रुपये का बिकता है, जिसमें रेडीमेड भी शामिल है। इसके अतिरिक्त 300 करोड़ रुपये के घर की सजावट के पर्दे, बेड शीट, चादर आज भी बिक जाते हैं।