पांच साल के अविनाश को निमोनिया था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोंडा से उसे इस उम्मीद के साथ केजीएमयू के लिए रेफर किए गया था कि उसे वहां बेहतर इलाज मिलेगा और बच्चा ठीक हो जाएगा। अविनाश के परिवारीजन उसे लेकर रविवार सुबह लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।
जहां उसे भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। दोपहर बाद अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने कहा कि अविनाश की जान बचाने के लिए उसे वेंटीलेटर पर रखना पड़ेगा। ट्रॉमा सेंटर के बाल रोग विभाग के चार वेंटीलेटर पर पहले से मरीज भर्ती थे।
बाल रोग विभाग में पांच में से सिर्फ एक ही वेंटीलेटर काम कर रहा था। जब तक उसे किसी ऐसे दूसरे अस्पताल शिफ्ट किया जाता जहां वेंटीलेटर उपलब्ध हो बच्चे ने दम तोड़ दिया।ऐसा नहीं है कि पीडियाट्रिक विभाग में वेंटीलेटर न होने से सिर्फ अविनाश ने ही दम तोड़ा है।