केजीएमयू के डॉक्टरों की लापरवाही और संवेदहीनता ने एक डेढ़ साल के बच्चे की जान ले ली। डॉक्टरों की लापरवाही का आलम ये था कि मां-बाप और अन्य परिवारीजन डॉक्टरों से बच्चे को भर्ती करने की गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने एक बात न सुनी।
बिना इलाज बच्चा डेढ़ घंटे तक एम्बुलेंस में तड़पता रहा और उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत से नाराज परिवारीजनों ने हंगामा किया तो डॉक्टरों ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की धमकी दे दी।
इसके बाद परिवारीजनों से सादे कागज पर अंगूठा लगवाने के बाद शव सौंप दिया। सीतापुर के धननाग के घनश्याम के डेढ़ वर्षीय बेटा अभिनव सोमवार को घर पर खेल रहा था।
इसी दौरान घर के बाहर खड़ी कार का दरवाजा खोलकर अंदर घुस गया। दरवाजा बंद होते ही सेंट्रल लॉक हो गया। काफी देर बाद लोग उसे ढूंढने लगे तो कार के भीतर वो बदहवास स्थिति में मिला।
पिता घनश्याम ने बताया कि आनन-फानन में अभिनव को सीतापुर के खैराबाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुधवार को हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने वेंटिलेटर की जरूरत बताकर एम्बुबैग के सहारे केजीएमयू रेफर कर दिया।
दादा महेश ने बताया कि दोपहर करीब सवा दो बजे एम्बुलेंस से अभिनव को ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे। कैजुअल्टी में अभिनव को लेकर गए तो डॉक्टरों ने अनसुना कर दिया। हालत बिगड़ी तो बच्चे को दोबारा एम्बुलेंस में लिटा दिया।