फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चंदन दास ने रौशन की गजल की महफिल

Fri, 30 May 2014 08:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
दिलकश नज्मों और सुरीली आवाज का संगम बृहस्पतिवार को गोमतीनगर स्थित आनंदी आर्किड में नजर आया।
विज्ञापन


जहां आनंदी कॉन्सेप्ट की ओर से चार दिवसीय ‘जश्न-ए-गजल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पहले दिन शमां-ए-महफिल को रौशन किया मशहूर गज़ल गायक चंदन दास ने। उन्होंने एक से बढ़कर एक गजल पेश कीं।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘पिया नहीं जब गांव में, आग लगे सब गांव में...’ गजल से की। इसके बाद उन्होंने ‘सबको दुश्मन बना लिया मैंने...’ सुनाई तो श्रोता वाहवाह कर उठे।
विज्ञापन


‘न जी भर के देखा न कुछ बात की, बड़ी आरजू थी मुलाकात की। इस तरह मुहब्बत की शुरुआत कीजिए...’ के बाद गज़ल गायक ने ‘खुदा का जिक्र करें या तुम्हारी बात करें...’, ‘कहीं चांद राह में खो गया, कहीं चांदनी भटक गई...’ और ‘उसकी गली में फिर मुझको इक बार ले चलो...’ सहित कई नज्में सुनाईं।

महफिल की शमां देर रात तक रौशन रही। गिटार पर राकेश आर्या, हारमोनियम पर फरीद, तबले पर सुभाष शर्मा लाले, कीबोर्ड पर गुंजन मैसी और ढोलक पर विनोद ने संगत की।
विज्ञापन

जबकि चंदन दास के मंच संभालने से पहले शहर के मशहूर फनकार प्रदीप अली ने कलामों से समा बांधे रखा।

उन्होंने ‘मुझको ऐसा इश्क अता हो या अल्लाह...’ चरागों की तरह आंखें जलें और शाम हो जाए’ गजल सुनाई तो वाहवाही के दौर शुरू हो गए।

फिर उन्होंने गुलाम अली की गजल ‘हमको किसके गम ने मारा, ये कहानी फिर कभी...’, ‘तेरी सूरत मुझे बताती है, याद तुझे भी मेरी आती है’ सहित कई गज़लें सुनाकर महफिल-ए-शमा को गुलजार रखा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें