मुख्यमंत्री का निर्देश पुलिस के लिए चुनौती साबित होने जा रहा है। फिलहाल पुलिस महकमे के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है जिससे पता किया जा सके कि प्रदेश में अवैध रूप से कितने बांग्लादेशी रह रहे हैं।
खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हजारों बांग्लादेशी झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं।
इसमें नोएडा और गाजियाबाद के अलावा मेरठ, सहारनपुर, बागपत, बुलंदशहर जिले में इनकी संख्या काफी ज्यादा है। खास बात यह कि अधिकतर बांग्लादेशियों ने यहां का राशन कार्ड या वोटर आईडी बनवा रखी है। ऐसे में पुलिस के लिए यह साबित करना चुनौती होगा कि कौन बांग्लादेशी है और कौन भारतीय। पहले भी कुछ बांग्लादेशियों को वापस भेजने की कोशिश हो चुकी है।
लेकिन भारतीय पहचान पत्र होने के कारण न्यायालय से उन्हें राहत मिल गई थी। कहा तो यह भी जा रहा है कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए कुछ लोगों ने इनके वोटर आईडी बनवा दिए। ऐसे बांग्लादेशियों की संख्या 10 से 15 प्रतिशत ही होगी जिनके पास भारतीय पते की कोई आईडी नहीं है। बाकी 85 से 90 प्रतिशत के पास कोई न कोई परिचयपत्र है।
मुख्यमंत्री ने विदेशियों को प्रदेश से बाहर करने के लिए कहा है। प्रदेश की सीमावर्ती सभी राज्यों में भाजपा की सरकार है। हरियाणा, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड की सीमाएं प्रदेश से लगती हैं। इनमें अगर खदेड़े जाते हैं तो पड़ोसी राज्यों को परेशानी होगी। अगर बांग्लादेश तक इनको छोड़ने की योजना बनती है तो बांग्लादेश इन्हें बिना आईडी के क्यों स्वीकार करेगा? यही सवाल पुलिस को परेशान कर रहे हैं।