पर्यावरण निदेशालय ने चक गंजरिया परियोजना को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है।
इस संबंध में एलडीए की ओर से बुधवार को अधिसूचना भी जारी कर दी है।
प्राधिकरण के अधिकारियों को उम्मीद है कि इसके काम में अब तेजी आएगी।
पर्यावरण निदेशालय ने एलडीए को हिदायत दी है कि क्षेत्र में हरियाली को नुकसान न पहुंचाया जाए और नया पौधरोपण भी किया जाए।
सीजी सिटी में 2200 करोड़ की परियोजनाएं
अखिलेश की अति महत्वाकांक्षी चक गंजरिया परियोजना में सीजी सिटी नाम से एलडीए एक अत्याधुनिक टाउनशिप बनाएगा। इसमें करीब 550 एकड़ में व्यावसायिक और आवासीय निर्माण होंगे। इनके जरिए सीजी सिटी की कई परियोजनाओं का वित्तीय पोषण भी किया जाएगा।
मेट्रो को भी 1000 करोड़ रुपये की मदद
इसके अतिरिक्त मेट्रो रेल परियोजना को भी 1000 करोड़ रुपये की मदद की जाएगी। एचसीएल कंपनी 100 एकड़ भूमि में आईटी सिटी का विकास करेगी। जिससे युवाओं को नौकरियां मिलेंगी और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण भी प्राप्त होगा। प्रदेश में अभी केवल नोएडा में ही ऐसी सुविधाएं मिल रही हैं।
आईटी सिटी में 50 एकड़ जमीन पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (ट्रिपल आईटी) बनेगा। इसके निर्माण पर कुल 110 करोड़ रुपये तथा अन्य कार्यों पर 18 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इसमें 50 प्रतिशत केंद्र सरकार, 35 प्रतिशत राज्य सरकार और 15 प्रतिशत औद्योगिक पार्टनर इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग देगा।
एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एटीआई) बनाया जाना है। लखनऊ विकास प्राधिकरण शहीद पथ से लगी 25 एकड़ जमीन आरक्षित कर चुका है।
इनवायरमेंट एनओसी पर अब बनी बात
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से सीजी सिटी जैसे महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास फरवरी में बिना एनवायरमेंट एनओसी के ही करा दिया था। दरअसल उस समय पर्यावरण निदेशालय में अनापत्ति देने वाली कमेटी ही भंग कर दी गई थी। यही वजह थी कि शिलान्यास समारोह क्रिकेट स्टेडियम की साइट पर आयोजित किया गया था।
अब प्राधिकरण को पर्यावरण निदेशालय की ओर से जानकारी दी गई है कि करीब 1000 एकड़ के इस परिक्षेत्र में होने वाले कार्यों के लिए एनओसी दे दी गई है।
इनका रखना पड़ेगा ख्याल
इस पूरे परिक्षेत्र में निश्चित सीमा ग्रीन बेल्ट रहेगी।सभी बिल्डिंगों को ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर बनाया जाएगा।कम से कम पेड़ काटे जाएंगे।जहां भी पेड़ काटे जाएंगे, वहां उसका दोगुना पौधरोपण किया जाएगा।कुछ खास प्रजातियों के पेड़ नहीं काटे जाएंगे।यहां भूमि पाने वाले आवंटियों को अपने क्षेत्र में निश्चित पेड़-पौधे लगाने होंगे।