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सरकारी नौकरियों की परीक्षा में फर्जीवाड़ा रोकने को उठाये जा सकते हैं ये बड़े कदम

Fri, 05 Oct 2018 12:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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यूपीएसएसएससी - फोटो : amar ujala
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सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक होने और कॉपियों के मूल्यांकन को लेकर हो रही फजीहत से बचने के लिए ऑनलाइन परीक्षा और ऑनलाइन मूल्यांकन का सुझाव सामने आया है। इसके लिए भर्ती आयोगों व चयन बोर्डों को जल्द से जल्द आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई गई है। 

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बृहस्पतिवार को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) के चेयरमैन सीबी पालीवाल की अध्यक्षता में शासन द्वारा गठित समिति की पहली बैठक हुई। इसमें एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और विभिन्न भर्ती आयोगों व चयन बार्डों के सचिव शामिल हुए।

बैठक में भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी तरीके से निर्विघभन संपन्न कराने के संबंध में विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। समिति जल्दी ही अपनी संस्तुतियां शासन को सौंपेगी।
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सूत्रों ने बताया कि समिति में सुझाव आया कि जिस तरह बहुविकल्पीय प्रश्नों वाली ओएमआर बेस्ड परीक्षाओं में प्रश्नपत्र से लेकर उत्तर तक ऑनलाइन वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाता है, उसी तरह डिस्क्रिप्टिव (वर्णनात्मक) प्रश्नों वाली उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराया जाए।

कहा गया है कि जहां तक संभव हो भर्ती परीक्षाएं ऑनलाइन कराई जाएं। जब ऑनलाइन परीक्षा संभव न हो तो उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन कराई जाएं। उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑनलाइन ही कराया जाए। मूल्यांकित उत्तरपुस्तिकाएं ऑनलाइन ही उपलब्ध कराई जाएं। इससे मूल्यांकन में हेराफेरी जैसी समस्या का समाधान हो जाएगा। पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी। किसी तरह के आरोप-प्रत्यारोप की गुंजाइश नहीं बचेगी।

हालांकि इसके लिए आयोगों में स्टाफ बढ़ाने, आवश्यकता के हिसाब से कंप्यूटराइजेशन कराने और इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना होगा। समिति ने सरकार को इस संबंध में जल्द से जल्द कार्यवाही की संस्तुति किए जाने की सहमति बनी है।

भर्ती परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थियों को गृह मंडल से जाना होगा बाहर

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थियों की सहूलियत और सुविधा का पूरा ध्यान दिया जाएगा। लेकिन, अभ्यर्थियों को परीक्षा देने गृह मंडल से बाहर जाना पड़ेगा। पेपर लीक व अन्य चुनौतियों से निपटने के लिए भर्ती परीक्षाओं में अधिकाधिक फुलप्रूफ तकनीक का प्रयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। तय हुआ कि परीक्षा केंद्र उन्हीं शिक्षण संस्थाओं को बनाया जाएगा जो तय मानक पर खरे उतरेंगे। इसके लिए मानक तय कर दिए गए हैं। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए ज्यादा दूरी न तय करनी पड़े। लेकिन परीक्षा केंद्र मंडल के बाहर ही आवंटित किए जाएं। प्रयास किया जाए कि परीक्षा केंद्र नजदीकी मंडलों में दिए जाएं। पूरब के अभ्यर्थी को पश्चिम और उत्तर वाले को दक्षिण न भेजा जाए।

एक से अधिक प्रश्नपत्र छपाने पर सहमति

पेपरलीक जैसी घटनाओं से बचाने के लिए एक से अधिक प्रश्नपत्र छपाने पर सहमति बनी। कौन सा प्रश्नपत्र उपयोग किया जाए, यह परीक्षा से ठीक पहले तय हो। इसके अलावा प्रत्येक प्रश्नपत्र के कई-कई सेट बनाने की व्यवस्था अपनाई जाती रहेगी। प्रश्नों का रैंडमाइजेशन किया जाएगा।

एक साथ फार्म भरने वाले एक केंद्र पर नहीं पड़ेंगे
कई बार यह बात सामने आई है कि जितने लोगों ने किसी एक साइबर कैफे, कंप्यूटर से आवेदन किया, सभी एक ही केंद्र पर और कई बार तो एक ही कमरे में क्रम से पड़ गए। अब ऐसी स्थिति नहीं होगी। बैठक में सहमति बनी है कि आवेदन के साफ्टवेयर में ही रैंडमाइजेशन की व्यवस्था कर दी जाए। इससे एक कक्ष या एक केंद्र पर एक साथ आवेदन करने वालों के पड़ने की संभावना खत्म हो जाएगी।

मानक की व्यवस्था तो पूरी क्षमता में आवंटित होंगे अभ्यर्थी

किस परीक्षा केंद्र पर कितने अभ्यर्थी आवंटित किए जाएं, इसके लिए कोई संख्या तय नहीं की जाएगी। सदस्यों का कहना है कि मानक पूरा करने वाले केंद्रों पर प्राथमिकता के आधार पर जितने अभ्यर्थी बैठ सकते हैं, उन्हें आवंटित किया जाए। मसलन, किसी राजकीय डिग्री कॉलेज या इंटर कालेज में 1000-1500-2000 अभ्यर्थी बैठक सकते हैं और इसके लिए वहां सभी मानक पूरे होते हैं। तो इस आधार पर उसे इससे कम संख्या पर सीमित करना ठीक नहीं होगा। उसे क्षमता के हिसाब से 1000-1500-2000 अभ्यर्थी दिए जाएं। ऐसी स्थिति में बेहतर प्रबंधन के लिए संख्या के हिसाब से केंद्र को तीन-चार सेक्टर में बांट दिया जाए। उसकी व्यवस्था के लिए कॉलेज प्राचार्य को मुख्य व्यवस्थापक और अन्य वरिष्ठ अध्यापकों को सेंटर प्रभारी बनाकर परीक्षा कराई जाए।

परीक्षा केंद्र बनाने के मुख्य मानक

  • सरकारी शिक्षण संस्थाओं को परीक्षा केंद्र बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद वित्त पोषित संस्थान केंद्र बनाए जाएंगे। अपरिहार्य होने पर ही निजी शिक्षण संस्थाएं केंद्र बनाए जा सकेंगे।
  • परीक्षा केंद्र के लिए बाउंड्रीवाल, वाइस के साथ सीसीटीवी कैमरा, सुरक्षा की दृष्टि से प्रवेश द्वारों की स्थिति देखी जाएगी।
  • रेलवे स्टेशन व बस स्टाप से केंद्रों की दूरी और केंद्र पर आने-जाने के लिए परिवहन व्यवस्था की सहज उपलब्धता भी देखी जाएगी।
  • परीक्षा केंद्रों की ख्याति पर अनिवार्य रूप से ध्यान दिया जाएगा। पूर्व की परीक्षाओं का केंद्र पर कैसा अनुभव रहा? कभी ब्लेकलिस्ट तो नहीं हुआ?
  • स्टाफ, संस्थान का स्वयं का है, या किसी अन्य संस्थान से लिए जाएंगे? जो स्टाफ हैं उनके बारे में केंद्राध्यक्ष की जिम्मेदारी।
  • संबंधित संस्थान की सुरक्षा ठीक से हो सकती है या नहीं।
  • पर्याप्त फर्नीचर, जनरेटर व यूपीएस की व्यवस्था है या नहीं।
  • पुरुष और महिला के अलग-अलग शौचालय हैं या नहीं।
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पेपर शेटर और मूल्यांकनकर्ताओं का बढ़ेगा मानदेय

भर्ती परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र बनाने और मूल्यांकन करने वाले विशेषज्ञों को आकर्षित करने के लिए समिति में मौजूदा मानदेय को बढ़ाने पर सहमति बन गई है। हालांकि मानदेय कितना बढ़े, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। समिति ने कहा है कि मानदेय पर निर्णय से पहले राज्य के सभी भर्ती संस्थाओं व लोक सेवा आयोग के मानदेय का अध्ययन कर लिया जाए। इसके बाद सहमति दी जाए।

राज्य के बाहर छपेंगे परीक्षा के पेपर
सूत्रों ने बताया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश के लिए प्रदेश के बाहर की अच्छे रेपुटेशन वाले प्रिंटिंग प्रेसों से ही प्रश्नपत्र छपाने पर सहमति बनी है। चयन आयोग प्रिंटिंग प्रेस करने के पहले अपने स्तर पर देखेंगे कि संबंधित प्रेस के पास अपना निजी इन्फ्रास्ट्रक्चर है। वह इस काम में किसी दूसरे से सहयोग तो नहीं लेगा? चयन आयोग संवेदनशील मुद्दा होने की वजह से पेपर छपाने वाले प्रिंटिंग प्रेस के बारे में गोपनीयता बरतते हैं। समिति में सहमति बनी है कि छपाई के बारे में साझे की कोई जरूरत नहीं है लेकिन यदि कोई चयन आयोग या बोर्ड किसी प्रिंटिंग प्रेस को ब्लेकलिस्ट करता है वह यह सूचना अन्य आयोगों से भी साझा करेगा। इससे दागी प्रिंटिंग प्रेस से दूसरी भर्ती संस्थाएं पेपर छपाने से बच सकेंगी।
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