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मुखौटा विकास का, पर बिसात बिरादरी की

Mon, 24 Mar 2014 11:20 AM IST
मनोज श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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कांग्रेस के पीएम पद के अघोषित उम्मीदवार राहुल गांधी शनिवार को प्रतापगढ़ में पंडित हो गए।
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नरेंद्र मोदी भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार घोषित होते ही खुद को अति पिछड़ा बताने में गर्व महसूस करने लगे।

‘यादव- मुसलमान’ समीकरण के भरोसे सपा सुप्रीमो मुलायमसिंह यादव सत्ता की सबसे ऊंची कुर्सी का ख्वाब पाले बैठे हैं तो दलितों की नेता मायावती जातीय समीकरणों के बूते ‘बैलेंस ऑफ पावर’ बनना चाहती हैं।

जाति पर टिकी है सबकी निगाह

हालांकि ‘फेसबुक जेनरेशन’ की उम्मीदों को देखते हुए सभी विकास की माला तो जप रहे हैं, पर सत्ता की सीढ़ी के लिए भरोसा जाति पर ही है।

इसीलिए जातीय लामबंदी में खुद को कमजोर पाते ही सपा बिना वक्त गंवाए सीतापुर में अनिल वर्मा को हटाकर भरत त्रिपाठी को मैदान में उतार देती है तो भाजपा भी बिजनौर से राजेंद्र सिंह की जगह कुंवर भारतेंद्र सिंह को मैदान में उतार देती है।

माहौल बदला, मुद्दे बदले, नेता बदले, पर जातियां अपनी जगह ही हैं। महासमर में जातियों को अपने पक्ष में गोलबंद करने की कोशिशें तेज होती दिख रही हैं।

कहीं खुल कर तो कहीं छिप-छिप कर। मु्द्दे व व्यक्ति गौण हो गए हैं और जातियों का रुझान ज्यादा महत्वपूर्ण।

अगड़ों की पार्टी, पिछड़ों पर भरोसा

विकास और सुशासन का राग अलापने वाली भाजपा सूची देखकर लगता है कि उसे पिछड़ों पर ही ज्यादा भरोसा है।

अगड़ों की मानी जाने वाली पार्टी में पिछड़ों की स्वीकार्यता अधिक बनाने के लिए मोदी को अति पिछड़ी जाति के तौर पर पेश किया जाता है। टिकट बंटवारे में ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य व अति पिछड़ों पर ध्यान दिया गया है।

घोषित प्रत्याशी 72
पिछड़े25 दलित16 ब्राह्मण15 ठाकुर14 वैश्य2 भूमिहार1

पिछड़ों व मुसलमानों को महत्व

हमेशा पिछड़ों व मुसलमानों की बात करने वाली समाजवादी पार्टी को इस बार भी अपने परंपरागत वोट बैंक पर भरोसा है, लेकिन अगड़ी जातियों और यादव, प्रजापति, भुर्जी, तेली, मौर्य, कुशवाहा जैसी पिछड़ी जातियों के साथ मुस्लिमों का समीकरण बनाकर चुनाव में बाजी मारने की तैयारी की है।

घोषित प्रत्याशी 78
पिछड़े 30 दलित 17 मुस्लिम 13 अगड़ी जातियां 18

सबसे ज्यादा ब्राह्मण उम्मीदवार

दलित वोटों के बूते राज करने वाली मायावती ब्राह्मणों व मुसलमानों पर ज्यादा डोरे डाल रही हैं।

पार्टी ने सभी दलों से अधिक ब्राह्मण व मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। 2007 के विस चुनाव में मायावती दलित, ब्राह्मण, मुसलमान गठजोड़ से जीती थीं।

हालांकि पिछले विस चुनाव में उनका यह दांव नहीं चला लेकिन आम चुनाव में वे फिर सोशल इंजीनियरिंग के भरोसे हैं।

घोषित प्रत्याशी 80 ब्राह्मण 21 मुस्लिम 19 दलित 17 पिछड़े 15 ठाकुर 8
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सभी जातियों में सेंधमारी की कोशिश

जातिवादी राजनीति का विरोध करने वाली कांग्रेस भी जाति के प्रभाव से उबर नहीं पाई।

टिकट बंटवारे में ब्राह्मणों के अलावा कायस्थ, वैश्य व अन्य जातियों के वोट में सेंधमारी की कोशिश की।

पार्टी ने पुराने समीकरणों पर नजर रखते हुए 12 प्रतिशत ब्राह्मण, 19.50 प्रतिशत मुस्लिम व बसपा से नाराज दलितों के बल पर बाजी जीतने की कोशिश की है।

मध्यवर्ग के कांग्रेस से मोहभंग के बाद उसे अतिपिछड़े व मुसलमानों का आसरा है।

घोषित प्रत्याशी 65
दलित 14 मुस्लिम 11 पिछड़े 14 ब्राह्मण 9 ठाकुर 8 अगड़ी जातियां 9
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