हालांकि सरकारी विभागों के बकाये की वसूली चिंता का विषय बनी हुई है। रेलवे व अन्य बड़े उपभोक्ताओं के ओपन एक्सेस के जरिए बिजली लेने से प्रतिवर्ष करीब 1300 करोड़ रुपये राजस्व की कमी हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति अवधि बढ़ाने, दो वर्षों में ग्रामीण बिजली कनेक्शनों की संख्या करीब दोगुनी होने और आपूर्ति लागत का सिर्फ 51 फीसदी बिलिंग होने से भी राजस्व में कमी हुई है।
गांवों में बिजली बिलों की वसूली चुनौती बनी हुई है। एक खुलासा यह भी हुआ है कि डार्क जोन में निजी नलकूप लगाने की छूट देने से प्रत्येक वर्ष 450 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हो रहा है। विभाग ने सीएम को बताया कि पिछले वर्ष चुनाव की वजह से बिजली टैरिफ में वृद्धि नहीं की गई, इससे भी टैरिफ गैप बढ़ा है।
सुधार के लिए केंद्र सरकार के साथ किए गए ‘उदय’ एमओयू में वर्ष 2020 तक टैरिफ वृद्धि का लक्ष्य 6.60 रखा गया है।
ये बड़ी चुनौती
यूपी में 2.83 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए सिर्फ 37 हजार अधिकारी-कर्मचारी हैं। उपभोक्ता व कर्मचारियों का अनुपात 1.35 प्रति हजार है जो पूरे देश में न्यूनतम है।
बिजली चोरी पर नियंत्रण के लिए गठित 33 स्क्वायड के अतिरिक्त प्रदेश सरकार ने 55 नए स्क्वायड की योजना बनाई जरूर, लेकिन वर्तमान में मात्र 20 दस्तों के लिए ही पुलिस बल उपलब्ध है। इससे विद्युत थाने भी नहीं शुरू हो पा रहे हैं।
सुधार का रोडमैप
राजस्व सकल तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों को 2020-21 तक 24.64 फीसदी से 15 प्रतिशत पर लाना।
2019-20 में आठ लाख स्मार्ट मीटर व 20-21 में 20 लाख स्मार्ट मीटर लगाकर बिलिंग गुणवत्ता बढ़ाना।
2020 तक लखनऊ व कानपुर के सभी सरकारी कार्यालयों व सरकारी आवासों में मार्च 2021 तक प्रीपेड मीटर लगाना।
ग्रामीण क्षेत्र के 30 लाख अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के यहां मार्च 2020 तक मीटर लगाना।
मार्च 2020 तक एक लाख व मार्च 2021 तक 5 लाख कनेक्शनों पर प्रीपेड मीटर लगाना।
1000 से अधिक आबादी वाले 19923 मजरों में मार्च 2020 तक तथा 28480 मजरों में मार्च 2021 तक एरियर बंच केबल लगेगा।
गांवों में बिजली आपूर्ति बढ़ाने से 6800 करोड़ की अतिरिक्त सब्सिडी की मांग।
पावरलूम उपभोक्ताओं को एक निश्चित सीमा तक बिजली उपभोग पर रियायती दर व उससे अधिक पर वास्तविक दर से वसूली।
बिजली खरीद व आपूर्ति अनुबंध के एमओयू की समीक्षा कर खरीद लागत में कमी लाना।
11 केवी के 120 नए केंद्रों का निर्माण मार्च 2020 तक व 972 का निर्माण मार्च 2021 तक करने का लक्ष्य।
मार्च 2020 तक तीन लाख उपभोक्ताओं को ऑनलाइन झटपट योजना के जरिए कनेक्शन देना।
ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार कर निजी नलकूप कनेक्शन, भार वृद्धि, खराब मीटर बदलने, प्रीपेड व पोस्टपेड मीटर का आपस में बदलाव व नाम परिवर्तन जैसी सेवाएं देना। उपकेंद्र केंद्रित निगरानी प्रणाली विकसित करना। 3086 ग्रामीण व 1255 शहरी उपकेंद्रों पर बढ़ेंगी सुविधाएं।