पिता के मुताबिक, 25 जुलाई को उन्होंने अमन के लापता होने का केस दर्ज कराया। इसके दो दिन बाद 27 जुलाई को हसनगंज पुलिस ने उन्हें गोमती नदी में मिले शव की शिनाख्त कराने के लिए बुलाया। उन्होंने कपड़े और मोबाइल से शव की शिनाख्त अमन के रूप में की।
बेटे का अंतिम संस्कार करने के बाद से वह काफी परेशान रहने लगे। इसी बीच उन्हें पता चला कि 23 जुलाई को रात में वर्षा के काल करने पर अमन घर से निकला था। हॉस्टल के कमरे से भी महिला का सैंडल बरामद हुआ था।
वर्षा ने कॉल कर परिजनों से अमन की मेल आईडी का पासवर्ड भी मांगा था। धर्मेश के मुताबिक, वह इस मामले में संदेह के आधार पर वर्षा के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराने हसनगंज थाने गए थे। लेकिन पुलिस ने उनका केस दर्ज नहीं किया।
इसके बाद धर्मेश ने कोर्ट में याचिका दायर की। जिस पर कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। पुलिस ने चार महीने बाद हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। प्रभारी निरीक्षक अमरनाथ वर्मा के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है।