भाजपा के प्रदेश प्रभारी अमित शाह पर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज हो गया है, इसे प्रदेश में भाजपा को लगे एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि बिजनौर के कान्हा फॉर्म में अमित शाह ने एक समुदाय विशेष के साथ सपा का नाम जोड़ते हुए कहा था कि अगर केंद्र में भाजपा की सरकार आई तो यूपी में मुलायम सरकार गिर जाएगी।
इस बयान पर राजनीतिक पार्टियों ने हंगामा करते हुए शाह की गिरफ्तारी की मांग की थी।
शाह ने जब यह बयान दिया, उस समय उनके साथ मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी विधायक सुरेश राणा भी मौजूद थे।
सांप्रदायिक भाषा का किया प्रयोग
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता व महिला कांग्रेस की अध्यक्ष शोभा ओझा ने कल रीता बहुगुणा जोशी का नामांकन दाखिल होने के बाद कहा था कि इस समय भाजपा का पूरा जोर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर है।
भाजपा के लोग इसीलिए सांप्रदायिक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, उन्होने मांग की थी कि अमित शाह को गिरफ्तार किया जाए।
अमित शाह के बयान के बाद ही उत्तर प्रदेश में सियासी माहौल में गर्मा गया था।
सपा, बसपा और कांग्रेस का आरोप है कि शाह मोदी के सांप्रदायिक चेहरे हैं।
ये था अमित शाह का बयान
अमित शाह ने अपने बयान में जनता से सपा सरकार को हराने की अपील करते हुए कहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सम्मान की लड़ाई हो रही है। मुजफ्फरनगर दंगों में जो अपमान हुआ है, अब उसका बदला लेने का वक्त आ गया है।
शाह ने जनता से कहा कि कोई भी इंसान भूखा और प्यासा तो रह सकता है पर अपना सम्मान खोकर कभी नहीं रह सकता है, अब बदला लेने का वक्त आ गया है।
आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर प्रदेश में सांप्रदायिकता को बढ़ाने का आरोप लगाया है।
आखिलेश ने साथ ही यह भी कहा कि हम प्रदेश का माहौल बिगड़ने नहीं देंगे।