लखनऊ के मड़ियांव छठा मील स्थित जीवन दीप हॉस्पिटल में बुधवार सुबह मरीज की मौत से भड़के तीमारदारों ने लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया। आरोप है डॉक्टर एक दिन पहले मरीज को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर से बेहतर इलाज दिलाने का झांसा देकर अस्पताल लाए थे।
मरीज की मौत के बाद डॉक्टर और स्टाफ अस्पताल छोड़कर भाग निकले। इसी बीच सूचना पाकर सीएमओ और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और अस्पताल पर ताला लगा दिया। पिता ने अस्पताल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
मड़ियांव निवासी युवक (30) टीबी समेत कई गंभीर बीमारी से ग्रसित था। हालत बिगड़ने पर परिवारीजनों ने उसे 30 जुलाई को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया था। वहां पर मुकम्मल इलाज मरीज को नहीं मिला।
पिता का आरोप है जीवन दीप हॉस्पिटल संचालक डॉ. मेहताब आलम मरीज को बेहतर इलाज दिलाने का झांसा देकर अपनी गाड़ी से मरीज को मंगलवार को अस्पताल ले आए। पिता का आरोप है कि डॉक्टरों ने पहले काउंटर पर पांच हजार रुपये नगद जमा कराए।
बगैर पंजीकरण चल रहे निजी हॉस्पिटल
- फोटो : डेमो
बाकी जांच में करीब बीस हजार रुपये ऐंठ लिए। डॉक्टरों के गलत इलाज से मरीज की हालत बिगड़ गई। बुधवार सुबह करीब पांच बजे मरीज ने दम तोड़ दिया। इससे नाराज तीमारदारों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।
इसी बीच डॉक्टर और स्टाफ भाग निकले। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने तीमारदारों को शांत कराया। पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। वहीं जानकारी पाकर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. डीके बाजपेई टीम के साथ अस्पताल पहुंचे और मामले की पड़ताल किया। पूरे मामले की रिपोर्ट सीएमओ को दी है।
शहर के कई निजी अस्पताल बिना पंजीकरण के धड़ल्ले से चल रहे हैं। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की सह पर यह अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं। दुबग्गा स्थित एक निजी अस्पताल में महिला से अभद्रता करने के बाद भी सीएमओ की टीम कई दफा वहां गई मगर हर बार लौट आई। यह हालत तब है जबकि हॉस्पिटल का पंजीकरण तक नहीं है। वहां पर मरीजों को भर्ती करके झोलाछाप उपचार कर रहे हैं।
अस्पताल का नहीं था पंजीकरण
डेमो
अस्पताल का नहीं था पंजीकरण
जीवन दीप हॉस्पिटल का लाइसेंस नहीं है। अस्पताल में एक और मरीज मिला था। उसे उसके परिवारीजन घर लेकर चले गए। फिलहाल अस्पताल में ताला लटका दिया गया है। इस मामले की जांच कर विधिक कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल को सील किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। - डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
पहले से गंभीर थी मरीज की हालत
तीमारदार बेहोशी की हालत में मरीज को अस्पताल लाए थे। इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई। मरीज गंभीर बीमारी से ग्रसित था। मरीज की मौत बाद तीमारदारों ने स्टाफ व डॉक्टर से मारपीट की। इसके बाद अस्पताल छोड़कर सभी लोग भाग गए। सीएमओ के यहां पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया है। - डॉ. मेहताब आलम, प्रबंधक, जीवन दीप अस्पताल