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सजा काट रहे बंदियों की पूर्व रिहाई के लिए योगी सरकार ने बनाई नीति, जानें- किसे मिलेगी 'आजादी'

Thu, 02 Aug 2018 01:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आजीवन कारावास से दंडित सिद्धदोष बंदियों को समय पूर्व रिहा करने के लिए राज्य सरकार ने स्थायी नीति तैयार कर ली। यह नीति हाईकोर्ट के निर्देश पर बनाई गई है। इसके लिए अदालत के आदेश पर एक समिति का गठन किया गया था। पहले बंदियों को रिहा करने को लेकर कोई तय नीति नहीं थी। जेल प्रशासन गणतंत्र दिवस पर बंदियों को उनकी आयु, आचरण और उनके द्वारा काटी गई सजा की अवधि (न्यूनतम 14 वर्ष) के आधार पर उन्हें रिहा करता था।

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नई स्थायी नीति में सिद्धदोष बंदियों की रिहाई की योग्यता का जो वर्गीकरण किया गया है, उनमें महिला बंदियों के लिए जिन्होंने विचाराधीन अवधि सहित 14 वर्ष की अपरिहार अथवा 16 वर्ष की सपरिहार सजा पूरी कर ली हो, को शामिल किया गया है। इसके अलावा ऐसे सिद्धदोष पुरुष बंदी, जिन्होंने विचाराधीन अवधि सहित 16 वर्ष की अपरिहार व 20 वर्ष की सपरिहार सजा पूरी कर ली हो, 12 तरह की चिह्नित गंभीर बीमारियों से पीड़ित ऐसे सिद्धदोष बंदियों जिन्होंने 10 वर्ष की अपरिहार व 12 वर्ष की सपरिहार सजा पूरी कर ली हो, उन्हें समय से पहले रिहा किया जा सकेगा।
 
आजीवन कारावास से दंडित ऐसे सिद्धदोष बंदी जिन्होंने 70 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो व 12 वर्ष की अपरिहार और 14 वर्ष की सपरिहार सजा पूरी कर ली हो, ऐसे सिद्धदोष बंदी जिन्होंने 80 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो और विचाराधीन अवधि सहित 10 वर्ष की अपरिहार व 12 वर्ष की सपरिहार सजा काट ली हो और ऐसे सिद्धदोष बंदी जिन्होंने विचाराधीन अवधि सहित 20 वर्ष की अपरिहार तथा 25 वर्ष की सपरिहार सजा पूरी कर ली हो को रिहाई के लिए पात्र माना गया है।
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अपरिहार और सपरिहार सजा
जेल प्रशासन कैदी के आचरण को देखते हुए उसे सजा में आंशिक छूट देता है। यह छूट अधिकतम एक साल में तीन माह तक हो सकती है। बगैर छूट के पूरी की गई सजा को अपरिहार व छूट सहित पूरी हुई सजा को सपरिहार कहा जाता है।

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इनकी नहीं हो सकेगी रिहाई

- आजीवन कारावास से दंडित ऐसे सिद्धदोष बंदी जिन्होंने रिहाई के लिए प्रार्थनापत्र नहीं दिया है।
- आजीवन कारावास से दंडित ऐसे सिद्धदोष बंदी जिनको यूपी के बाहर के न्यायालय ने दंडित किया है।

- आजीवन कारावास से दंडित ऐसे सिद्धदोष बंदी जिनको न्यायालय ने स्पष्ट्र रूप से जीवनपर्यंत कारागार में निरुद्ध रहने की सजा दी हो या किसी निर्धारित समय सीमा के लिए ऐसा आदेश दिया हो।
भाड़े के हत्यारे और सामूहिक नरसंहार के आरोपी।

- कारावास के दौरान जेल मैनुअल के तहत दंडित किए गए हों।

- आजीवन कारावास से दंडित ऐसे सिद्धदोष बंदी जो भारतीय नागरिक नहीं हैं।

- जो नारकोटिक्स, आतंकवाद, मादक पदार्थ, सीमा शुल्क, विदेशी मुद्रा की तस्करी, भिक्षावृत्ति के लिए किसी को विकलांग बनाने, स्त्री का अपहरण, वेश्यावृत्ति के लिए स्त्री को बेचने आदि के आरोपों में सजायाफ्ता हों।
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