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डॉक्टरों का गंदा खेल: टेबल से गिर कर मरा नवजात, बोले- मरा पैदा हुआ

Sun, 01 May 2016 04:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : demo pic
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माल सीएचसी में डॉक्टरों की लापरवाही से नवजात की जान चली गई। शनिवार सुबह सात बजे पहुंची गर्भवती का डॉक्टर इलाज करने से कतराते रहे। प्रसूता की हालत बिगड़ी तो शाम सात बजे प्रसव कराया गया।
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प्रसव के बाद नवजात ओटी टेबल से स्लिप होकर टेबल से टकराता हुआ गिर गया और थोड़ी देर बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद डॉक्टरों ने कागज पर कटिंग कर गर्भ में ही शिशु की मौत की बात लिख दी जिससे नाराज परिवारीजनों ने जमकर हंगामा किया।

माल के फूलतरा गांव के जितेंद्र रावत की सात महीने की गर्भवती पत्नी कुसुम को प्रसव पीड़ा के बाद शनिवार सुबह छह बजे सीएचसी लेकर पहुंचे थे। जितेंद्र ने बताया कि एएनएम सुरभि पटेल ने जांच करने के बाद भर्ती कर लिया।
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दो घंटे बाद डॉ. प्रियंका मौर्या ने कुसुम को डफरिन अस्पताल जाने की सलाह दी। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉ. संजय गुप्ता ने रेफर करने से मना कर दिया। शाम सात बजे प्रसव कराया गया।

कुसुम ने परिवारीजनों को बताया कि प्रसव के बाद वहां मौजूद स्टाफ ने नवजात को नहीं संभाला और वो ओटी टेबल से फिसलकर नीचे गिर गया। नवजात के नीचे गिरते ही स्टाफ ने उसे उठाया तो उसकी सांस उल्टी चल रही थी। इसके बाद भी डॉक्टरों ने सामान्य बताकर इलाज नहीं किया और 25 मिनट बाद उसकी मौत हो गई।
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इसके पहले भी इस तरह हुई हैं मौतें

सीएचसी में इससे पहले भी नवजात की मौत डॉक्टरों की लापरवाही से हुई थी जिसके बाद तीन दिन तक शव रखकर प्रदर्शन हुआ था लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कुंडली मारे बैठे रहे।

...और ऐसे कर दिया खेल
परिवारीजनों का आरोप है कि प्रसव के बाद डॉक्टरों ने जीवित शिशु की बात कागज में अंकित की। घटना के बाद डॉक्टरों ने कागज में कटिंग करते हुए आईयूडी लिख दिया जिसका मतलब गर्भ में शिशु की मौत होती है। सीएचसी के डॉक्टरों की लापरवाही से नवजात की मौत पर मनमानी से नाराज परिवारीजनों ने जमकर हंगामा किया।

डॉक्टरों की सफाई
इस मामले में सीएचसी के डॉ. संजय गुप्ता से बात की गई तो उनका फोन बंद मिला। अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव ने मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि बच्चे का वजन एक किलो दो सौ ग्राम था। प्रसव के बाद नवजात कम दिन का था इसलिए उसकी मौत हो गई।

परिवारीजनों के सभी आरोप गलत हैं। डॉ. प्रियंका मौर्या का कहना है कि प्रसूता ओपीडी में आई थी। उसकी परेशानी देखते हुए लखनऊ रेफर करने की सलाह दी गई थी। इलाज में लापरवाही की बात गलत है।
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