केजीएमयू के सर्जिकल वार्ड में कीमोथेरेपी के लिए आने वोले मरीजों से वसूली के मामले में सिस्टर पर गाज गिर गई है। केजीएमयू के प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले में तीमारदारों का लिखित बयान दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सिस्टर इंचार्ज की पैसे की मांग के चलते कैंसर पीड़ित महिला की कीमोथेरेपी बुधवार को अधिकारियों के निर्देश पर हो गई।
बुधवार को वार्ड में मरीजों से वसूली करने वाली सिस्टर को वार्ड से ओपीडी में भेज दिया गया है।
मालूम हो कि केजीएमयू के सर्जिकल वार्ड के सात नंबर वार्ड में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित लखीमपुर, चंदीपुर की रहने वाली ऊषा देवी (35) से वार्ड में ड्यूटी पर तैनात सिस्टर पुष्पलता श्रीवास्तव ने कीमोथेरेपी की दवा के लिए तीन हजार रुपये की मांग की थी।
देवर मनोज तिवारी ने पैसे देने से मना किया तो नौ दिन तक कीमोथेरेपी की दवा नहीं दी गई। इसके बाद मनोज ने कैंसर मरीजों से वसूली की शिकायत सीएमएस से की जिसके बाद जांच शुरू हो गई थी।
वहीं दूसरी ओर केजीएमयू के सीएमएस, चिकित्सा अधीक्षक, उप चिकित्सा अधीक्षक ने मरीजों के तीमारदारों का लिखित बयान बंद कमरे में दर्ज किया।
केजीएमयू के सर्जिकल वार्ड में इलाज करा रहे कैंसर के तीन मरीजों ने सिस्टर पर वसूली का आरोप लगाया है।
केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एससी तिवारी का कहना है कि कैंसर पीड़ितों से वसूली की जांच शुरू हो गई है। सिस्टर इंचार्ज को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर वार्ड से ओपीडी में तबादला कर दिया गया है।
तीमारदारों का लिखित बयान दर्ज कर लिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। किसी वार्ड में ऐसी घटना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।