डेढ़ साल से चल रहे नया राशन कार्ड बनवाने के कार्य में अड़चनें बरकरार हैं। आवेदन फॉर्मों की एनआईसी स्तर पर फीडिंग के बाद सॉफ्टवेयर सत्यापन में गलत नाम पते के आधार पर अनाज आवंटन बढ़ाने को राशन विक्रेताओं द्वारा किए गए फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।
एडीएम आपूर्ति ओपी राय ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर सत्यापन के दौरान फर्जी नाम व पते के आधार पर नया राशन कार्ड बनवाने के प्राप्त सभी आवेदन फॉर्म निरस्त कराए जाएंगे।
साथ ही जिस राशन विक्रेता की दुकान से सौ से अधिक ऐसे गलत नाम व पते के आवेदन पत्र नया राशन कार्ड बनवाने को सत्यापित कर भेजे गए होंगे। उन्हें भी कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा।
आपूर्ति विभाग के अनुसार नया राशन कार्ड बनवाने के लिए जिले के शहरी व ग्रामीण इलाकों को मिलाकर करीब 9.10 लाख आवेदन फॉर्म राशन दुकान विक्रेताओं से भरवा कर डिजिटाइजेशन को एनआईसी में फीडिंग के लिए दिए गए थे।
फॉर्मों में दर्ज सूचनाओं की फीडिंग के आधार पर प्रिंटेड राशन कार्ड ही तैयार कर वितरित किया जाना है। डाटा फीडिंग के बाद हर राशन दुकान से नया राशन कार्ड बनवाने को जमा कराए गए ऐसे फॉर्मों का स्थलीय सत्यापन कराया गया।
जिनमें दर्ज नाम, पते को सॉफ्टवेयर द्वारा आशंकित श्रेणी में चिह्नित किया गया था। खुलासा हुआ है कि कई इलाकों के राशन विक्रेताओं ने कोटा बढ़ाने को दुकान से जुड़े फर्जी आवेदकों के फॉर्म भी सत्यापित कर भेजे थे।
राशन अनाज की कालाबाजारी करने को कराए जा रहे इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने से क्षेत्रीय आपूर्ति कार्यालयों में हड़कंप हैं।
क्योंकि राशन दुकानदारों द्वारा सत्यापित कर भेजे गए आवेदन पत्रों की निगरानी का कार्य एआरओ कार्यालय स्तर पर नामित आपूर्ति निरीक्षकों को ही सौंपा गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम आपूर्ति ओपी राय ने एनआईसी स्तर पर डाटा फीडिंग में फर्जी सूचनाओं के आधार पर राशन कार्ड बनाने को भेजे गए सभी आशंकित आवेदन फॉर्म निरस्त कर पूरे मामले की गहन जांच जिला पूर्ति अधिकारी के स्तर पर कराने की बात कही है।
दूसरी तरफ, नया राशन कार्ड बनवाने के आवेदन फॉर्मों में उजागर हुए इस खेल के बाद नए राशन कार्ड बन कर वितरित कराए जाने का कार्य एक बार फिर लेटलतीफ होना तय हो गया है।