इन महंगे फ्लैट्स के लिए आवास विकास परिषद 10 प्रतिशत राशि पंजीकरण शुल्क के रूप में लेती थी, मगर नई योजना में इसे आधा कर दिया गया है। आवेदक को फ्लैट की कीमत की पांच प्रतिशत राशि ही पंजीकरण के समय जमा करनी होगी।
नहीं लगाने होंगे बैंकों के चक्कर
आवास विकास परिषद से किस्तों पर फ्लैट मिलने से आवंटिययों को कर्ज के लिए बैंकों के चक्कर नहीं काटने होंगे। वहीं, उनको किसी गारंटर की जरूरत नहीं होगी। आवंटी को मकान के लिए बैंकों से उतना कर्ज नहीं मिल पाता, जितने की संपत्ति होती है। बैंक आवंटी की आय केहिसाब से कर्ज देते हैं। इतना ही नहीं, फ्लैट बंधक रखने के बाद भी बैंक आवंटी को दिए गए लोन के एवज में गारंटी लेते हैं। वहीं, आवास विकास में पूरा पैसा किस्तों पर अदा करने की सुविधा रहेगी और गारंटर का भी झंझट नहीं होगा।
योजना की शुरुआत लखनऊ, आगरा और गाजियाबाद से होगी। इनमें लखनऊ की अवध विहार आवासीय योजना में मंदाकिनी और भागीरथी मल्टीस्टोरी योजना, गाजियाबाद की सिद्धार्थ विहार योजना में गंगा, यमुना और हिंडन मल्टीस्टोरी योजना और आगरा की ग्रीन एन्क्लेव योेजना शामिल हैं। इन योजनाओं में 500 से अधिक फ्लैट रेडी टू मूव की स्थिति में हैं। आवंटी तत्काल इनमें शिफ्ट कर सकते हैं।
आवास आयुक्त धीरज साहू का कहना है कि महंगे फ्लैट भी अब दस साल की किस्तों पर आवंटित किए जाएंगे। इसके लिए कार्ययोजना तैयार हो गई है। जल्द ही योजना को लॉन्च कर दिया जाएगा।