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आयुष्मान भारत योजना की वेबसाइट में सेंध, लाभार्थियों के साथ जोड़ लिए गए हजारों बाहरी नाम

Sat, 04 Jan 2020 09:26 PM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
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ayushman bharat yojana
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प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान भारत योजना की वेबसाइट में लाभार्थियों के परिवार के छूटे  सदस्यों को जोड़ने के लिए शुरू की गई  ‘एड मेंबर’ विकल्प का जालसाजों ने नाजायज फायदा उठाया। वेबसाइट में सेंध लगाकर लाभार्थियों के परिवार में नाजायज तरीके से जुड़ गए। अस्पतालों में तैनात आरोग्य मित्र भी उनकी जालसाजी को पकड़ नहीं पाए। लेकिन अधिक संख्या में नाम बढ़ाने के लालच और जिन परिवारों में जालसाजों ने घुसपैठ की थी, उनकी निगाह से जालसाज नहीं बच पाए। 
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शिकायत के बाद फर्जी तरीके से बढ़ाए गए नाम आयुष्मान भारत योजना की वेबसाइट पर ब्लॉक कर दिए गए हैं। अब इस जालसाजी को रोकने के लिए केंद्र सरकार की मदद से आयुष्मान योजना की वेबसाइट को अन्य पोर्टल से सीधे जोड़ा जाएगा।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान भारत योजना में लाभार्थियों का डाटा 2011 में हुए सोशियो इकोनॉमिक कास्ट सेंशस (एसईसीसी) से लिया गया है। यूपी के इसमें 1.18 करोड़ परिवार शामिल हैं। सामाजिक आर्थिक जातिगत जनगणना और आयुष्मान भारत योजना लागू करने में लगभग आठ साल का अंतर है। 
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ऐसे में माना गया कि 2011 के बाद लाभार्थी परिवारों में कोई बहू या फिर बच्चा बढ़ा होगा। लेकिन उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा था। ऐसे में केंद्र सरकार ने योजना की वेबसाइट में ‘एड मेंबर’ का विकल्प दे दिया। जिससे लाभार्थी परिवार अपने नए सदस्यों को भी योजना में जुड़वा सके। बताया जा रहा है कि इसके लिए राशन कार्ड और किसी अन्य प्रूफ के साथ आरोग्य मित्र के पास जाकर नए सदस्यों को जुड़वाया जा सकता है।

बस इसी एड मेंबर विकल्प का जालसाजों ने फायदा उठाया। उन्होंने राशन कार्ड की जानकारी वाली वेबसाइट से लाभार्थी के परिवार की जानकारी जुटाई। उसका राशन कार्ड नंबर लिया और नकली राशन कार्ड बनवाकर उसमें नए सदस्यों के नाम जुड़वा लिए। आरोग्य मित्रों ने भी जब राशन कार्ड का नंबर अपनी वेबसाइट पर डाला तो उसको लाभार्थी के परिवारीजनों के नाम सही दिखे और उसने नए सदस्यों को इसमें जोड़ लिया। 

इसी कमी का जालसाजों ने फायदा उठाया और फर्जी तरीके से लाभार्थियों के परिवार से जुड़ते रहे। लेकिन इस फर्जीवाड़े में लाभार्थी परिवारों में 10 से अधिक लोग जुड़ने लगे तो केंद्र सरकार को कुछ गड़बड़ी की आशंका हुई। नए सदस्यों का पता लगाने के लिए जिलों के जानकारी भेजी गई तो पूरे रैकेट का खुलासा हो गया। इसके बाद जालसाजों के नाम वेबसाइट पर ब्लॉक किए गए।

एपीआई से जुड़ेंगे पोर्टल, एक सप्ताह में शुरू होगी सुविधा

आयुष्मान भारत योजना की नोडल एजेंसी साचीज की सीईओ संगीता सिंह ने बताया कि जालसाजों के खेल को रोकने के लिए प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और राशन कार्ड की जानकारी वाली वेबसाइट को आपस में एपीआई (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) से जोड़ा गया है। इससे लाभार्थी का डाटा तुरंत मैच हो जाएगा। इसका परीक्षण चल रहा है। 

एक सप्ताह के अंदर ये सुविधा शुरू हो जाएगी। इसके अलावा मरीज के आने और डिस्चार्ज के समय उसका बॉयोमैट्रिक वैरीफिकेशन भी शुरू कर दिया गया है। इससे भी फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में झांसी, आजमगढ़ और प्रयागराज से सबसे अधिक मामले फर्जीवाड़े के मामले सामने आए हैं। आजमगढ़ से एक व्यक्ति को इस मामले में जेल भी भेजा गया है।
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