सपा नेता और एमएलएसी बुक्कल नवाब उर्फ एमए खान को राहत न देते हुए हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से रोक लगाने से इन्कार कर दिया है।
सपा नेता की ओर से बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रार्थना पत्र दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर पर किसी भी तरह की कार्रवाई या गिरफ्तार पर रोक लगाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था। इस पर अदालत ने उन्हें कोई राहत नहीं दी।
मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी। बुक्कल नवाब पर गोमती नदी की भूमि पर गलत दावा कर मुआवजा लेने का आरोप है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर इस मामले में उनके खिलाफ वजीरगंज थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में एफआईआर दर्ज करवाई गई है।
हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में बताया गया था कि बुक्कल नवाब ने जियामऊ व आसपास के गांवों की जमीनों को अपनी बताते हुए नदी के विकास कार्य के लिए भूमि अर्जन के समय करीब आठ करोड़ रुपये मुआवजा जिला प्रशासन से लिया था।
हाईकोर्ट ने इस मामले की उच्च स्तरीय समिति बनाकर जांच करवाई है। जांच समिति का कहना है कि नवाब ने अपने दावे का आधार 1977 में चिनहट तहसील में हुए एक निर्णय को बताया है, लेकिन इस निर्णय की मूल फाइल तहसील अभिलेखागार में नहीं है।