मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शाहबेरी में अवैध रूप से कॉलोनियां विकसित करने वाले 30 बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत जेल भिजवाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शाहबेरी, यमुना एक्सप्रेस-वे, नोएडा और ग्रेडर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण से जुड़े मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लोकभवन में बुधवार शाम नोएडा, ग्रेटर नोएडा और शाहबेरी से जुड़े मामलों को लेकर बुलाई गई बैठक में मुख्यमंत्री ने कोर्ट के स्टे के बावजूद शाहबेरी में निर्माण पर नाराजगी जताई। कहा कि निर्माण कैसे हुआ इसकी जांच कराई जाए। 2014 के बाद हुए निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की सूची बनाई जाए। साथ ही 2007 से 2014 तक (सपा-बसपा शासन में) जमीन मामलों में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए उनकी सूची बनाने के निर्देश दिए।
भवनों की सुरक्षा आडिट करवाने के आदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि शाहबेरी में सभी निर्माणों की सुरक्षा आडिट होनी चाहिए। जो निर्माण सुरक्षित नहीं है, उनको गिराने की प्रक्रिया प्राधिकरण को करनी चाहिए। जिन मकानों व फ्लैट्स में लोग रह रहे हैं। उनकी जांच करवाई जाए। ताकि पता चल सके कि ये लोग कौन हैं और बिल्डरों से इन लोगों ने कैसे भवन खरीदे। योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस पूरे मामले की अदालत में बेहतर तरीके से पैरवी की जाए।
मंत्री, सांसद व विधायक लोगों से संवाद कायम करें
मुख्यमंत्री ने बैठक में मौजूद कैबिनेट मंत्री सतीश महाना से कहा है कि शाहबेरी मामले को लेकर मंत्री सतीश महाना, स्थानीय सांसद और विधायक के साथ प्राधिकरण के अधिकारी वहां के लोगों से संवाद कायम करें। जिससे इसका समाधान किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा है कि शाहबेरी में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार वचनबद्ध है।
बिल्डर्स के मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो
मुख्यमंत्री ने कहा है कि आम्रपाली समेत अन्य बिल्डर्स के मामले में तत्कालीन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने कहा कि 2007 से लेकर 2010 तक नोएडा, ग्रेटर नोएडा अथारिटी में कौन अधिकारी तैनात था और किन अधिकारियों ने बिल्डरों को फायदा पहुंचाया, इसकी जांच शासन स्तर पर की जाए। जिन अधिकारियों ने अराजकता और अव्यवस्था फैलाने का काम किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
आवास व एलडीए द्वारा बनाए आवासों की भी होगी जांच
मुख्यमंत्री ने कहा है कि आवास विकास और लखनऊ विकास प्राधिकरण के आवासों की भी जांच होनी चाहिए। क्योंकि लगातार इनके आवासों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने मुख्य सचिव अनूपचंद्र पाण्डेय को निर्देश दिया है कि आवास और एलडीए के अधिकारियों की मीटिंग कर उनके कार्यों की समीक्षा करें।