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महाकुंभ-2013 के दौरान हुए हादसे के लिए रेलवे जिम्मेदार, विधानसभा में रिपोर्ट पेश

Wed, 24 Jul 2019 11:36 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सांकेतिक तस्वीर
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साल 2013 में महाकुंभ के दौरान हुए हादसे के लिए आयोग ने रेल प्रशासन को जिम्मेदार माना है। विधानसभा में में हादसे को लेकर एकल सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट रखी गई। आयोग ने जांच में रेल प्रशासन की ओर से लापरवाही पूर्वक भ्रम फैलाने वाली सूचनाओं को घोषित करने को मुख्य कारण माना है। आपको बता दें कि महाकुंभ 2013 के दौरान 10 फरवरी को मौनी अमावस्या के मौके पर प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर हुए हादस हुआ था। 
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इस मामले में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीष ओंकारेश्वर भट्ट की अध्यक्षता में सदस्यीय जांच आयोग का गठन 17 फरवरी 2013 को किया गया था। आयोग ने घटना के कारणों, किए गए प्रयासों का परीक्षण, घटना के लिए उत्तरदायित्व का जिक्र करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हों इसके लिए कई सुझाव दिए हैं। सदन को बताया गया है कि सरकार ने आयोग द्वारा की गई संस्तुतियों और सुझावों पर कार्यवाही शुरू की है। 

रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि रेल प्रशासन द्वारा चिकित्सक और चिकित्सीय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई थी। इसके लिए तत्कालीन डीआरएम हरिंद्र राव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी जिम्मेदार हैं। राजकीय रेलवे पुलिस के पास न तो कोई एंबुलेंस था और ना ही कोई चिकित्सक नियुक्त था। 
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दिए गए ये सुझाव

  • रेलवे स्टेशन पर रैपिड एक्शन फोर्स अथवा भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष बलों का प्रयोग किया जाए। 
  • महाकुंभ या अर्द्धकुंभ के दौरान इलाहाबाद रेलवे जंक्शन से मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन ना किया जाए। 
  • ट्रेनें इस तरह चलाई जाएं कि जंक्शन पर यात्रियों का दबाव कम से कम रहे। 
  • जंक्शन पर दो अतिरिक्त फुट ओवरब्रिज बनाया जाए। 
  • साथ ही दो एफओबी को एकल दिशा मार्ग के रूप में प्रयोग किया जाए।
  • प्लेटफार्म और परिसर में इतनी मात्रा में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं कि हर हिस्से पर नजर रखी जा सके। 
  • प्रदेश शासन के स्तर पर स्थाई रूप से मेला प्रबंधन विभाग गठित की जाए। 
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घटना की ये वजहें बताई गईं

  • यात्री आश्रय स्थल का बहुत छोटा होना
  • रेल प्रशासन द्वारा भ्रम उत्पन्न करने वाली सूचनाएं प्रसारित किया जाना
  • फुट ओवरब्रिज-तीन को घटना से पूर्व और बाद में नहीं खोला जाना
  • भीड़ की दशा में पूर्व से प्रस्तावित योजनाओं का क्रियान्वयन जनपद पुलिस द्वारा नहीं किया जाना
  • राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा वापसी वाले तीर्थयात्रियों को पर्याप्त संख्या में वापस ले जाने में असफल रहना
  • दुर्घटना के बाद रेल अधिकारियों द्वारा मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया जाना
  • मेला स्पेशल गाड़ियों का समय से नहीं चलाया जाना
  • रेल परिसर में यात्रियों के आवागमन के लिए एकल दिशा मार्ग की व्यवस्था नहीं किया जाना
  • सिविल लाइंस की तरफ से इलाहाबाद जंक्शन पर यात्रियों के आगमन को रोकने ले लिए प्रभावी व्यवस्था का न किया जाना
  • दुर्घटना के दिन और उससे एक दिन पूर्व से मालगाड़ियों का आवागमन बंद नहीं किया जाना
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