इनमें प्रमुख रूप से सहारा सिटी होम्स, रतन हाउसिंग, एमार एमजीएफ, श्रीइंफ्रा, शाइन सिटी, प्रोपलरिटी समूह शामिल हैं। इनमें से अधिकांश के खिलाफ पुलिस में भी एफआईआर दर्ज कराई गईं। रेरा सचिव अबरार अहमद का कहना है कि हमारी पहली प्राथमिकता आवंटियों के हित को पूरा करना है। बिल्डर कंपनी पर कार्रवाई शुरू कर दी जाती है तो प्रोजेक्ट के पूरा नहीं होने की आशंका पैदा हो जाती है। ऐसे में रेरा की टीम कोशिश करती है कि प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए बिल्डर पर दबाव बनाया जाए।
ये तो संगठित लूट जैसा....कार्रवाई के साथ आवंटियों को भी राहत मिले
आवंटियों का कहना है कि बिल्डरों पर कार्रवाई होनी चाहिए। इससे संगठित लूट को आगे होने से रोका जा सकेगा। इसके साथ ही लेकिन जिन परिवारों के साथ लूट हुई है। उनको भी राहत भूखंड, फ्लैट या रिफंड दिलाकर दिलानी चाहिए। अभी तक रेरा भले ही कुछ मामलों में रिफंड दिलाने में सफल रहा हो, पर पुलिस ने कुछ ठोस कार्रवाई नहीं की हैं।रोहतास के मामले में असली दोषियों पर पुलिस कार्रवाई नहीं कर सकी है। अंसल के मामले में तो अभी तक कार्रवाई ही शुरू नहीं हो पाई है।
कहां क्या हाल?
बिल्डर प्रभावित आवंटी फंसे प्रोजेक्ट
अंसल 6500 1, हाईटेक टाउनशिप
रोहतास 1800 4, दो इंटीग्रेटेड टाउनशिप
शाइन सिटी 8000 6 से अधिक
आरसंस 2500 4 या अधिक प्रोजेक्ट
श्री इंफ्रा 800 3
प्रोपलरिटी 1500 5-6 प्रोजेक्ट प्रस्तावित रहे