फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शाहजहांपुर: गिरे पुल की होगी उच्चस्तरीय जांच, वेल के नीचे ऑर्टिजन बनने की आशंका

Thu, 02 Dec 2021 11:51 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

शाहजहांपुर में गिरे पुल के बड़े हिस्से की उच्चस्तरीय जांच करवाने की तैयारी है। इसके लिए सेतु निगम के एमडी ने विशेषज्ञों के साथ मौका मुआयना किया।
विज्ञापन
सेतु निर्माण निगम की टीम जांच करती हुई (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शाहजहांपुर में एक पुल के बड़े हिस्से के जमींदोज होने को सरकार ने गंभीरता से लिया है। सेतु निगम के एमडी योगेश पवार ने विशेषज्ञों के साथ बुधवार को मौका मुआयना किया। हालांकि, यह टीम किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। इसके सही कारणों की पड़ताल के लिए उच्चस्तरीय परीक्षण की जरूरत बताई जा रही है। पुल के वेल (कुआं) के नीचे ऑर्टिजन बनने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

विज्ञापन


शाहजहांपुर में कलान-मिर्जापुर क्षेत्र को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण 18 सौ मीटर लंबा कोलाघाट पुल सोमवार को तड़के पिलर धंसने से ढह गया था। करीब दो सौ मीटर हिस्सा जमींदोज होने से पुल तीन हिस्सों में बंट गया। यह पुल 2009 में बनाया गया था। कुछ अभियंता इसकी जांच सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) से कराने की जरूरत बताते हैं, ताकि असली कारण सामने आने पर भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

विशेषज्ञों ने ये आशंकाएं भी जताईं
पीडब्ल्यूडी के जानकारों का कहना है कि आजकल इस तरह की मशीनें उपलब्ध हैं, जो यह बता देती हैं कि पिलर (खंभा) समेत वेल की गहराई कितनी है। इससे आसानी से यह पता लगाया जा सकता है कि पुल का निर्माण तय डिजाइन के अनुसार हुआ या नहीं। ऐसा तो नहीं कि वेल की गहराई डिजाइन से कम कर दी गई हो, जो हादसे का कारण बना हो। यह भी देखना होगा कि वेल की तली पर कंक्रीट का ढांचा (तकनीकी भाषा में बॉटम प्लगिंग ऑफ वेल), मध्य भाग की प्लगिंग और वेल कैप (सबसे ऊपरी हिस्सा) मानक के अनुसार बनाया गया नहीं।
विज्ञापन


वेल की तली और कैप की कंक्रीट के ढांचे में तो कोई दिक्कत नहीं आई। वेल कैप फेल होने से भी खंभा नीचे धंस जाता है, जो पुल टूटने की वजह बनता है। अगर वेल में ऑर्टिजन बना होगा, तो पूरा स्ट्रक्चर सिकुड़ने लगता है, जिससे भी पिलर अंदर चला जाता है। पुल का जो हिस्सा गिरा है, उसके गर्डर और स्लैब गिरने पर भी नहीं टूटे हैं, इसलिए जानकारों का कहना है कि उसके ऊपरी हिस्से की क्वालिटी में कोई गड़बड़ नहीं मालूम पड़ रही है। अलबत्ता सही स्थिति जांच के बाद ही साफ हो सकती है।

विज्ञापन

विशेषज्ञों से जांच कराने का निर्णय : एमडी

सेतु निगम के एमडी योगेश पवार ने बताया कि पुल का एक हिस्सा कैसे गिरा, इसका विशेषज्ञों से परीक्षण कराने का निर्णय लिया गया है। गहराई की जांच की जाएगी। लोड टेस्टिंग भी कराएंगे। मिट्टी की जांच भी होगी। आर्टिजन बनने की आशंका को भी देखा जाएगा। अगर बाकी खंभे जांच में सही मिले तो गिरे हुए हिस्से को ही नए सिरे से बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कहां और क्या दिक्कत रही, इसे परीक्षण पूरा होने के बाद ही बताया जा सकता है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें