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नजाकत और नफासत की जमीं लखनऊ में बनेगी अत्याधुनिक ब्रह्मोस मिसाइल

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नीरज अंबुज, लखनऊ। अदब, नजाकत और नफासत की पहचान वाली लखनऊ की सरजमीं पर अब अत्याधुनिक ‘ब्रह्मोस’ मिसाइलें बनेंगी। ये मिसाइलें सेना की शान हैं। जिसका नाम सुनकर ही दुश्मनों के छक्के छूट जाते हैं। हरौनी में अगले दो से तीन साल में 200 एकड़ जमीन पर इसकी निर्माण इकाई बनकर तैयार हो जाएगी। जहां सालाना 80 से 100 मिसाइलें बनेंगी। इससे करीब दस हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। पहले चरण में नौसेना के लिए ब्रह्मोस एनजी (नेक्स्ट जनरेशन) बनेगी।
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लखनऊ में रक्षा औद्योगिक गलियारे (डिफेंस कॉरिडोर) व एयरोस्पेस विनिर्माण समूहों के विकास में तेजी लाने के लिए डीआरडीओ अपनी तरह का पहला रक्षा प्रौद्योगिकी और परीक्षण केंद्र (डीटीटीसी) स्थापित कर रहा है। जो एयरपोर्ट के पास होगा। जबकि ब्रह्मोस विनिर्माण केंद्र हरौनी में बनाया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर लखनऊ का कायाकल्प हो जाएगा। इससे रोजगार के अवसर तो बढ़ेंगे ही साथ ही नए स्टार्ट अप व उद्योगों को भी मदद मिलेगी। डीआरडीओ के डीजी, रिसोर्स एंड मैनेजमेंट संगम सिन्हा ने बताया कि हरौनी गांव में 200 एकड़ से अधिक जमीन पर ब्रह्मोस एनजी संस्करण की उत्पादन इकाई बनेगी। यह नया केंद्र अगले दो से तीन वर्षों में तैयार हो जाएगा और प्रति वर्ष 80 से 100 मिसाइलों की दर से उत्पादन शुरू होगा।
डीआरडीओ को मुफ्त में दी जमीन
डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी ने बताया कि ब्रह्मोस एनजी के निर्माण केंद्र के लिए जितनी जमीन की जरूरत थी, उसे राज्य सरकार ने महज डेढ़ महीने में ही उपलब्ध करवा दिया। यह दो सौ एकड़ जमीन डीआरडीओ को मुफ्त में दी गई है।
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ऐसे काम करेगा डीटीटीसी
22 एकड़ जमीन पर रक्षा प्रौद्योगिकी और परीक्षण केंद्र (डीटीटीसी) का निर्माण किया जाएगा। डीटीटीसी लखनऊ डीप टेक स्टार्टअप्स और उद्योगों की प्रौद्योगिकी परामर्श और हैंडहोल्डिंग के लिए डिजाइन, बिल्ड, टेस्ट, लर्न का काम करेगा। यह अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी की स्थापना के लिए उद्योगों को सुविधा देगा। यह अनूठा सेटअप डीआरडीओ के आईपीआर, पेटेंट और टीओटी को समझने के लिए ब्रिज का काम करेगा। इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। इसके डीप टेक इनोवेशन एंड स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर, डिजाइन और सिमुलेशन केंद्र, परीक्षण और मूल्यांकन केंद्र, उद्योग केंद्र, डिजिटल विनिर्माण, कौशल विकास केंद्र और व्यवसाय विकास केंद्र होंगे।
इसलिए खास हैं ब्रह्मोस एनजी
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे रूस की मदद से भारत ने बनाया है। यह दुनिया की ताकतवर मिसाइलों में है। जो हवा में ही मार्ग बदल सकती है और चलते-फिरते लक्ष्य को भी भेद सकती है। यह 10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है और राडार की पकड में भी नहीं आती। ब्रह्मोस अमेरिका की टॉम हॉक मिसाइल से लगभग दोगुनी तेजी से वार कर सकती है। ब्रह्मोस के अत्याधुनिक वर्जन को ब्रह्मोस एनजी कहा जाता है। संगम सिन्हा ने बताया कि ब्रह्मोस एनजी के नेवी वर्जन के बाद सेना व वायुसेना के वर्जन बनाए जाएंगे।
‘प्रदर्शनी’ में दिखी डीआरडीओ की ताकत
शिलान्यास कार्यक्रम में डीआरडीओ की ओर से प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। इसमें डीआरडीओ के उत्पादों को लगाया गया, यह दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही। लोगों ने सेल्फी लीं। प्रदर्शनी में सरवाइवल ब्लैंकेट, पैराट्रूपर पैराशूट सिस्टम, ब्रह्मोस के आर्मी, नेवी व एयरफोर्स वर्जन के मॉडल, ब्लास्ट प्रोटेक्शन सूट वगैरह लगाए गए थे।
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