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45 हजार बीपीएड युवा बनेंगे शारीरिक शिक्षक!

Thu, 22 Jan 2015 10:15 AM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) वालों को संघर्ष का फल मिलने वाला है। राज्य सरकार उन्हें भी इंटर कॉलेजों में शारीरिक शिक्षक के लिए पात्र मानने का मन बना रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली 1983 में संशोधन की तैयारी है।
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माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। नियमावली संशोधन के बाद बीपीएड वाले भी इंटर कॉलेजों में शारीरिक शिक्षक बनने के लिए पात्र हो जाएंगे।

प्रदेश में मौजूदा समय करीब 45,000 बीपीएड वाले नौकरी की तलाश में घूम रहे हैं। इन्हें निजी स्कूलों या परिषदीय स्कूलों में संविदा शिक्षक बनने का ही मौका मिल पाता है।
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इंटर कॉलेजों में शारीरिक शिक्षक के लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि व शारीरिक शिक्षा में डिप्लोमा वालों को पात्र माना गया है। बीपीएड वालों का कहना है कि वे डिग्रीधारक हैं। डिप्लोमा से इसे उच्च माना जाना चाहिए, लेकिन सरकार इन्हें अपात्र मान रही है।
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हाईकोर्ट के आदेश पर कवायद

हाईकोर्ट ने इंटर कॉलेजों में शारीरिक शिक्षक के लिए बीपीएड वालों को भी पात्र मानने का आदेश दिया है। राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षक भर्ती के लिए निकाले गए 6,645 शिक्षकों के पदों में इन्हें भी शामिल करने की बात कही गई है। जानकारों की मानें तो इसके बाद ही बीपीएड वालों को शारीरिक शिक्षक भर्ती के लिए पात्र मानने की कवायद शुरू हुई है।

प्रस्ताव के मुताबिक शारीरिक शिक्षक के मौजूदा समय 298 पद खाली बताए गए हैं। इसमें यह भी बताया गया है कि चयन बोर्ड ने वर्ष 2009 में 246, वर्ष 2010 में 165, वर्ष 2011 में 54 तथा वर्ष 2013 में 194 शारीरिक शिक्षकों की भर्ती के विज्ञापन निकालते हुए भर्ती की। मौजूदा समय करीब 298 शारीरिक शिक्षक के पद खाली हैं।

एनसीटीई की भी अनदेखी
इस पर बीपीएड संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष रवि शास्‍त्री ने कहा है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने बीपीएड वालों को शारीरिक शिक्षक के लिए पात्र मानते हुए वर्ष 2001 में इस संबंध में अधिसूचना जारी की थी।

इसके आधार पर राज्य सरकार को उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली 1983 में संशोधन करते हुए बीपीएड वालों को शारीरिक शिक्षक के लिए पात्र मानना था, लेकिन इसकी भी अनदेखी कर दी गई। हाईकोर्ट के आदेश पर अब बीपीएड वालों को शारीरिक शिक्षक के लिए पात्र मानते हुए नियमावली को जल्द संशोधित किया जाना चाहिए।
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