लेसा के इलाकाई इंजीनियरों की लापरवाही जनता पर भारी पड़ रही है। एक अक्तूबर को मेला देखकर घर लौट रहा युवक ट्रांसफार्मर के तारों के करंट की चपेट में आकर झुलस गया था।
इस युवक की चार अक्टूबर को मौत हो गई। लोगों ने ट्रांसफार्मर के कटे-पिटे तारों को बदलने की मांग की थी, पर सुनवाई नहीं हुई।
मड़ियांव पुलिस के मुताबिक, मुतक्कीपुर गांव निवासी सगीर का बेटा दानिश (22) कढ़ाई का काम करता था। एक अक्तूबर देर शाम वह चार दोस्तों संग मेला देखकर घर लौट रहा था।
रास्ते में ट्रांसफार्मर के पड़ोस से गुजरने पर कटे तारों के करंट की चपेट में आकर झुलस कर तड़पने लगा। दोस्तों ने शोर मचाया तो आसपास के लोग दौड़े और डंडे से दानिश को अलग किया।
पिता ने उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां चार अक्तूबर की रात उसकी मौत हो गई। बेटे को खोने के गम में मां तरिबुल का रो-रोकर बेहाल हो गया था।
लापरवाही का आलम ये है कि इलाके इंजीनियरों ने न तो पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता पहुंचाई। ना ही ट्रांसफार्मर के कटे-पिटे तारों को बदला। इन तारों से खतरा अभी भी बना हुआ है।