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केजीएमयू : बोटॉक्स इंजेक्शन से होगा खाने की नली से जुड़ी दुर्लभ बीमारी का इलाज

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केजीएमयू के मेडिसिन विभाग में आयोजित कार्यशाला में एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के ? - फोटो : ??? ?????
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लखनऊ। पानी पीने में दिक्कत, खाना निगलने में दर्द व एसिडिटी के साथ लगातार वजन में कमी आए तो यह खाने की नली से जुड़ी दुर्लभ बीमारी एक्लेसिया कार्डिया का लक्षण हो सकता है। यह जानकारी एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. यूसी घोषाल ने केजीएमयू के मेडिसिन विभाग में आयोजित कार्यशाला में दी। उन्होंने बताया कि यह बीमारी मरीज को कमजोर कर देती है। वजन गिरने से अन्य अंग भी काम करना बंद कर देते हैं और कुछ समय बाद मरीज की मौत भी हो जाती है। करीब एक हजार में किसी एक में पाई जाने वाली इस बीमारी का समय से इलाज जरूरी है।
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डॉ. घोषाल ने बताया कि एक्लेसिया कार्डिया के मरीज का अभी सिर्फ एसजीपीजीआई में इंडोस्कोपी विधि से बोटॉक्स इंजेक्शन देकर इलाज किया जा रहा है। अब यह सुविधा केजीएमयू में भी हो जाएगी। कार्यशाला के दौरान खाद्य पदार्र्थ निगलने में समस्या से पीड़ित 18 साल की युवती को इंडोस्कोपी से बोटॉक्स इंजेक्शन दिया गया। डॉ. घोषाल ने इंजेक्शन देने की प्रक्रिया सहित इलाज की अन्य तकनीक भी ऑनलाइन करीब 50 से ज्यादा चिकित्सकों को बताई। छह साल पहले बीमारी की चपेट में आई इस मरीज का वजन 45 किलो से घटकर 23 किलो हो गया था। कमजोरी की वजह से सर्जरी नहीं हो सकती थी, इसलिए इंजेक्शन दिया गया। करीब चार माह बाद इसकी स्थिति में सुधार आने पर पोयम तकनीक से उसका इलाज होगा। केजीएमयू मेडिसिन विभाग के डॉ. अजय कुमार पटवा ने बताया कि बोटॉक्स का इंजेक्शन करीब 18 हजार में आता है। गरीब मरीज को मुफ्त इंजेक्शन दिलाया गया। यह इंजेक्शन स्थिति सामान्य होने तक हर छह माह में दिया जाता है। कार्यशाला में मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र आतम सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
मेडिसिन विभाग में पोयम तकनीक भी होगी शुरू
खाने की नली की मांसपेशियों के सख्त होने, उसकी चाल बदलने जैसी समस्याओं का बिना सर्जरी के पर-ओरल इंडोस्कोपिक मायोटमी (पोयम) तकनीक से इलाज होता है। इसमें मरीज के मुंह के जरिये इंडोस्कोप को खाने की नली से सब म्यूकोसा में पहुंचाते हैं। वहां सख्त मांसपेशियों व स्फिंटर में चीरा लगाकर रास्ता साफ कर दिया जाता है। इससे खाने की नली की चाल ठीक हो जाती है और स्फिंटर खुलने लगता है।
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