लखनऊ। भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय वेबिनार हुआ। ‘कथक नृत्य के शिक्षण और प्रस्तुतीकरण का विकास वैश्वीकरण के संदर्भ में’ विषय पर आयोजित वेबिनार में वक्ताओं ने कहा कि कथक में शिक्षण और प्रस्तुतीकरण दोनों की ही भूमिका अहम होती है।
भातखंडे विवि की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने पंडित बिरजू महाराज के कथक नृत्य के वैश्वीकरण में योगदान को रेखांकित किया। कथक की शिक्षा में शैक्षणिक संस्थाओं के महत्वपूर्ण योगदान की भी चर्चा की। पूर्णिमा पांडेय ने विष्णु दिगंबर पलुस्कर और विष्णु नारायण भातखंडे के साथ ही पंडित बिरजू महाराज के योगदान पर चर्चा की। दिल्ली से पं. राजेंद्र गंगानी ने कहा कि गोपी किशन, पंडित दुर्गलाल, कुमुदिनी लखिया, सितारा देवी, रोशन कुमारी ने कथक को पूरे विश्व में पहुंचाया। वेबिनार की संयोजक डॉ. ज्ञानेंद्र दत्त बाजपेई और डॉ. रुचि खरे ने सभी कलाकारों का स्वागत किया गया।
वैश्वीकरण से कथक के पारंपरिक स्वरूप को बचाना चुनौती
पं. बिरजू महाराज कथक संस्थान की अध्यक्ष कुमकुम धर ने कहा कि वैश्वीकरण से आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत हुए, जिससे सांस्कृतिक आदान- प्रदान को बढ़ावा मिला। वैश्वीकरण ने कथक की प्रस्तुतियों को समृद्ध किया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के कारण कथक के पारंपरिक स्वरूप को बचाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। शिखा खरे ने कहा कि वैश्वीकरण को जीवित रखना अपनी समृद्ध परंपरा को जीवित रखना है।