राजधानी में आने वाले कुछ वर्षों में कैंसर से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीजों को बोनमैरो (अस्थिमज्जा) ट्रांसप्लांट की सुविधा भी मिलने लगेगी।
यहां चक गंजरिया में प्रस्तावित विश्वस्तरीय कैंसर अस्पताल और शोध संस्थान के जरिए ये संभव हो सकेगा।
इस अस्पताल में हर साल 10 हजार कैंसर मरीजों की सर्जरी की जाएगी, जबकि 20 हजार मरीजों का इलाज होगा।
100 एकड़ की मेडिसिटी में इस अस्पताल और रिसर्च सेंटर का निर्माण किया जाएगा, जिसमें एक हजार बेड की सुविधा होगी। निर्माणकर्ता एजेंसी राजकीय निर्माण निगम होगा।
इसकी बिल्डिंग का निर्माण बतौर सिग्नेचर बिल्डिंग किया जाएगा। आर्किटेक्ट चयन के लिए प्रक्रिया जारी है। 11 कंपनियों ने इस सिग्नेचर बिल्डिंग के लिए जो डिजाइन बनाए हैं, जल्द ही उसका प्रस्तुतिकरण शासन के आला अधिकारियों के समक्ष किया जाएगा।
फिलहाल अभी उत्तर भारत के किसी भी अस्पताल में बोनमैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे हर साल इलाज के अभाव में सैकड़ों मौतें हो जाती हैं।
केवल उच्च आय वर्ग के लोग ही अपने मरीजों को दक्षिण भारत के कुछ बड़े अस्पतालों या फिर देश के बाहर ले जा पाते हैं, जबकि निमभन और मध्यम आय वर्ग के लोगों के सामने अपने मरीजों को मरते हुए देखने के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं होता है।
हालांकि, राजकीय निर्माण निगम ने 11 आर्किटेक्ट कंसलटेंट के सामने जो डिजाइन ब्रीफ की है, उसमें इस इंस्टीट्यूट और इसमें शामिल सभी सुविधाओं का उल्लेख किया गया है। काफी साल पहले पीजीआई में इस सुविधा को शुरू करने कोशिश की गई थी, मगर यह प्रयोग कामयाब नहीं हो सका था।
सिग्नेचर बिल्डिंग, जो दोबारा नहीं बनेगी
यह एक सिग्नेचर बिल्डिंग होगी, जो दोबारा नहीं बनेगी। इस बिल्डिंग की डिजाइनिंग के लिए इच्छुक 11 कंपनियों को इस बात की जानकारी राजकीय निर्माण निगम की ओर से दे दी गई है कि वे दोबारा कभी ऐसी डिजाइन नहीं बनाएंगे। चयन के बाद बाकायदा उन्हें इस आशय के एग्रीमेंट पर साइन करना होगा।
इस बिल्डिंग की डिजाइनिंग के लिए 11 आर्किटेक्ट फर्म ने अपनी इच्छा टेंडर के माध्यम से व्यक्त की है। इन सभी के डिजाइनों का प्रस्तुतिकरण पहले प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य उसके बाद मुख्य सचिव के समक्ष किया जाएगा। इसके बाद एक फर्म को फाइनल कर आगे की प्रक्रिया का आगाज होगा।
- एके पांडेय, सहायक परियोजना अधिकारी, राजकीय निर्माण निगम