प्रो. अजय ने बताया कि नई तकनीक में चीरा छोटा लगता है। नसों के कटने का खतरा न के बराबर होता है। चार सेमी. के रास्ते से स्टेम सेल को प्रवेश कराने के बाद एबी जेल के जरिये ऊपर पैकिंग कर दी जाती है। इससे स्टेम सेल के बाहर निकलने का खतरा नहीं रहता है। इसमें बच्चे के शरीर से करीब 20 एमएल बोन मैरो लिया जाता है और उसे सेंटीफ्यूजन से छह एमएल का बना लिया जाता है। फिर उसे प्रत्यारोपित किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 20 मिनट लगता है।