लखनऊ में गर्भवती महिलाओं को अब खून के लिए बड़े अस्पतालाें के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रसव के समय जरूरत पड़ने पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से ही खून मिल सकेगा। वहीं, एनीमिया होने पर खून की व्यवस्था न होने से भी गर्भवती महिलाओं को बड़े अस्पतालों के लिए रेफर नहीं करना पड़ेगा।
इसके लिए ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्राें के साथ अब नगरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी ब्लड स्टोरेज यूनिट की शुरुआत कर दी गई है। इंदिरानगर सीएचसी में एक मई से शुरू यूनिट में फिलहाल 6 यूनिट ओ-पॉजिटिव, दो यूनिट बी-पॉजिटिव समेत कुल 12 यूनिट खून मौजूद है।
अलीगंज, एनके रोड समेत अन्य नगरीय सीएचसी में भी इसकी शुरुआत कर दी गई है। ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में करीब दो माह पहले ही ब्लड स्टोरेज यूनिट खोली जा चुकीं।
कम होगा बड़े अस्पतालों का बोझ
- फोटो : डेमो
सीएचसी में ब्लड स्टोरेज यूनिट खुलने से राजधानी के बड़े महिला अस्पतालों का भार भी कम होगा। अब तक एनीमिक गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए ग्रामीण या नगरीय सीएचसी पहुंचती थी तो खून मौजूद न होने से हाई-रिस्क फैक्टर बताकर उन्हें वीरांगना अवंतीबाई (डफरिन), झलकारी बाई, क्वीन मेरी या लोहिया अस्पताल भेज दिया जाता था। लेकिन अब ऐसी गर्भवती महिलाओं को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इन अस्पतालों में खुलनी थी यूनिट
नेशनल हेल्थ मिशन की योजना में प्रदेशभर के 148 अस्पतालों में ब्लड स्टोरेज यूनिट खोली जानी थी। वहीं, राजधानी के 12 अस्पतालों में इंदिरानगर सीएचसी, अलीगंज सीएचसी, ऐशबाग सीएचसी व नवल किशोर रोड स्थित सीएचसी शामिल थीं।
ग्रामीण इलाके में मलिहाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, काकोरी सीएचसी, गोसाईंगंज सीएचसी व मोहनलालगंज सीएचसी थी। इसके अलावा लोकबंधु, रानीलक्ष्मीबाई, डफरिन व झलकारी बाई महिला अस्पताल थे। डफरिन व झलकारी बाई महिला अस्पतालों ने पास ही ब्लड बैंक होने का हवाला देते हुए स्टोरेज यूनिट के लिए मना कर दिया था।