संघ और सभी अनुषांगिक संगठन सामाजिक समरसता के तहत दलित और मलिन बस्तियों में जनाधार बढ़ाएंगे। वहीं दूसरे छोर पर भाजपा की ओर से बस्ती संपर्क अभियान शुरू कर मोदी-योगी सरकार की ओर से अनुसूचित जाति वर्ग के लिए लागू योजनाओं और उपलब्धियों को बताया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा प्रदेश में दलितों और अल्पसंख्यकों को साधकर लोकसभा चुनाव की जमीन तैयार करने में जुटेंगे। संघ के सर संघचालक मोहनराव भागवत के चार दिवसीय अवध प्रांत के प्रवास का लब्बोलुआब यही है। संघ प्रमुख संघ और सभी अनुषांगिक संगठनों के लिए रोडमैप तैयार कर गए।
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संघ प्रमुख के चार दिवसीय लखनऊ प्रवास से पहले सह सर कार्यवाह अरुण कुमार ने लखनऊ में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर संघ के सभी अनुषांगिक संगठनों, भाजपा और प्रदेश सरकार के साथ संवाद किया था। उन्होंने सभी अनुषांगिक संगठनों से मिले जमीनी फीडबैक भाजपा और सरकार के प्रमुख लोगों को बताते हुए चुनाव से पहले कील कांटे दुरुस्त करने का मंत्र भी दिया।
अरुण कुमार के दौरे के बाद 22 से 25 सितंबर तक संघ प्रमुख ने लखनऊ में प्रवास किया। यहां उन्होंने पहले ही दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ लंबा-विचार विमर्श किया। भागवत ने प्रवास के दौरान संघ के प्रांत व विभाग टोली की बैठक के साथ प्रबुद्धजन के साथ संवाद में मुस्लिमों पर भी बड़ी चर्चा हुई। संघ प्रमुख ने सामाजिक सद्भाव के तहत मुस्लिम और ईसाई समाज के बीच जाकर उनसे संपर्क और समन्वय बढ़ाने पर बात की। वहीं मुस्लिमों को भी अपना बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक ओर जहां भाजपा पसमांदा मुस्लिम समाज के वोट बैंक में सेंध लगाने में जुटी है। दूसरी ओर संघ ने भी मुस्लिम समुदाय से संपर्क बढ़ाने की बात की है इसका मकसद लोकसभा चुनाव में अल्पसंख्यक वोट बैंक हासिल करना है।
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उधर, संघ और सभी अनुषांगिक संगठन सामाजिक समरसता के तहत दलित और मलिन बस्तियों में जनाधार बढ़ाएंगे। वहीं दूसरे छोर पर भाजपा की ओर से बस्ती संपर्क अभियान शुरू कर मोदी-योगी सरकार की ओर से अनुसूचित जाति वर्ग के लिए लागू योजनाओं और उपलब्धियों को बताया जाएगा। जानकारों का मानना है कि संघ के दलित वर्ग में पैठ बढ़ाने का फायदा सीधे तौर पर लोकसभा चुनाव में भाजपा को भी मिलेगा।
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रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से माहौल बनाएंगे
अयोध्या मंदिर निर्माण तेजी के साथ चल रहा है।
- फोटो : amar ujala
संघ प्रमुख के अवध प्रांत के प्रवास से लौटते ही अयोध्या में बन रहे राम मंदिर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियां तेज हो गई है। 22 से 24 जनवरी की तिथि मानकर संघ और भाजपा अब रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए प्रदेश भर में माहौल बनाएंगे। जानकारों का मानना है कि इसके जरिये हिन्दुत्व के एजेंडे को धार दी जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषक रामदत्त त्रिपाठी का मानना है कि यह अनुभव रहा है कि जब भाजपा सत्ता में होती है तो संघ को विस्तार में आसानी होती है। संघ समाज में जो परिवर्तन चाहता है वह भी आसान होता है। उनका मानना है कि संघ प्रमुख से लखनऊ आने से पहले और उनके प्रवास के दौरान जो बैठक हुई उसमें तमाम हिन्दू परिवारों तक संघ की पहुंच बनाना मकसद है। संघ प्रमुख ने मुस्लिमों को जोड़ने की बात की है। साथ ही आगे जो राजनीतिक चुनौतियां है उसके लिए लोगों को तैयार करना है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
वरिष्ठ पत्रकार के.विक्रम राव का मानना है कि मोहन भागवत के दौरे का बड़ा राजनीतिक महत्व है। इस दौरे ने संघ, भाजपा और सरकार तालमेल के अभाव को दूर किया है। उनका मानना है कि इंडिया गठबंधन के चलते लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। इस चुनौती को दूर करने के लिए संघ ने अपने काडर को सक्रिय किया है। उनका मानना है कि सामाजिक समरसता से दलितों को साधने का प्रयास सफल हो गया तो लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ जाएगा। उनका मानना है कि संघ के मुस्लिमों से संपर्क का भाजपा पर कितना असर पड़ेगा यह आने वाला वक्त ही बताएगा। क्योंकि भाजपा पहले ही ट्रिपल तलाक सहित अन्य मुद्दों से मुस्लिमों को साधने का प्रयास करती रही है।
युवाओं की आत्महत्या पर समाज को जागरूक करेगा संघ
संघ प्रमुख ने विद्यार्थियों और युवाओं की आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जाहिर की। उन्होंने संघ को आत्महत्या की घटनाएं रोकने के लिए समाज को जागरूक करने का एजेंडा सौंपा है। संघ और अनुषांगिक संगठन समाज में लोगों को बताएंगे कि सप्ताह में कम से कम एक बार बच्चों के साथ संवाद करें। बच्चों की मनोदशा समझने का प्रयास करें और उन पर करियर या पढ़ाई का दबाव न डालें।