अभियान के तहत भाजपा नेता लोगों को बताएंगे कि बांग्लादेश में 1947 में हिंदू 22 प्रतिशत थे। वे 2011 में 7.8 प्रतिशत रह गए। पाकिस्तान में 1947 में हिंदुओं की आबादी 23 प्रतिशत थी। वह 2011 में मात्र 3.2 प्रतिशत रह गई। अफगानिस्तान में भी तेजी से हिंदुओं की आबादी घटती गई। इसके विपरीत भारत में 1951 की जनगणना में मुस्लिम आबादी 9.8 प्रतिशत थी। वह बढ़कर 2019 में 14.23 प्रतिशत हो गई। पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं बांग्लादेश के सर्वोच्च पदों पर किसी हिंदू, जैन, बौद्ध, पारसी या सिख को काम करने का मौका नहीं मिला।
इसके विपरीत भारत में सभी शीर्ष पदों पर इन्हें मौका दिया गया। इसके लिए पहले चरण में भाजपा के लोग डॉक्टरों, अधिवक्ताओं, प्रोफेसरों, अध्यापकों, सेवानिवृत्त अधिकारियों सहित समाज के अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों से संपर्क कर और छह स्थानों पर सभाएं करके नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के बारे में बताएंगे। दूसरे चरण में जिला स्तर पर गोष्ठियों और जनजागरण के अभियान चलेंगे।
बीएचयू के राजनीति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. कौशल किशोर का कहना है कि मुसलमानों को समझना होगा कि सीएए लागू हुए लगभग एक पखवाड़ा हो चुका है। इस दौरान किसी भारतीय मुस्लिम की नागरिकता नहीं गई है तो आगे भी नहीं जाएगी। यह कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए गैर मुस्लिम जो वहां अल्पसंख्यक की श्रेणी में आते हैं, उन्हें भारत की नागरिकता देने के लिए बनाया गया है। जिन देशों से आए गैर मुस्लिमों की बात हो रही है, वे मुस्लिम देश ही हैं। मुस्लिम वहां अल्पसंख्यक नहीं हैं कि इस कानून का लाभ उन्हें मिले। इस कानून का विरोध न सिर्फ इन देशों से आए गैर मुस्लिमों को भाजपा के पक्ष में लामबंद कर रहा है बल्कि देश के उन हिंदुओं को भी भाजपा के पक्ष में खड़ा कर रहा है जो अभी तक भाजपा को वोट नहीं देते थे। सीएए का विरोध हिंदुओं को भाजपा के पक्ष में अयोध्या आंदोलन से अधिक लामबंद कर रहा है।