भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कांठ मामले में सरकार पर सच छिपाने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि सरकार तुष्टीकरण के चलते तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जानकारी दे रही है।
उन्होंने प्रमुख सचिव गृह को पत्र भेजकर पूछा है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना में जब कांठ (मुरादाबाद) के अकबरपुर-चंदेरी गांव में मंदिर और मस्जिद दोनों पर लाउडस्पीकर लगे होने की जानकारी दी गई है तो किन कारणों से सिर्फ मंदिर से ही लाउडस्पीकर हटाया गया।
उन्होंने प्रमुख सचिव से आयुक्त स्तर के अधिकारी से पूरे प्रकरण की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की।
आरटीआई के तहत ये जानकारियां मांगी
भाजपा अध्यक्ष ने बुधवार को यहां पत्रकारों को बताया कि मुरादाबाद के आरटीआई कार्यकर्ता पवन अग्रवाल ने मुरादाबाद के पुलिस अधीक्षक ग्रामीण कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत इस गांव में मंदिर व मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकरों के बारे में जानकारी मांगी थी।
इसमें यह भी पूछा गया था कि कांठ में कुल कितने मंदिर एवं मस्जिद निर्मित हैं।
थानेवार, स्थान व निर्माण वर्ष की जानकारी, निर्माण की अनुमति कब दी गई मंदिर-मस्जिदों पर कितने लाउडस्पीकर लगे हैं और इसे लगाने की कब अनुमति दी गई आदि जानकारियां मांगी गई थीं।
मस्जिदों के बारे में शासन ने नहीं दी जानकारी
वाजपेयी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक कार्यालय अपेक्षित जानकारियां नहीं दे पाया है। जवाब में बताया गया है कि कांठ के संबंधित गांव अकबरपुर-चंदेरी में जाटवों की बस्ती में शिव मंदिर है। मंदिर पर लाउडस्पीकर लगा है। पर, यह कबसे लगा है इसकी तारीख नहीं बताई गई है।
मस्जिदों के बारे में बताया गया है कि लाउडस्पीकर लगे हैं। पर, किसी के बारे में यह नहीं बताया गया है कि यह कबसे लगे हैं। किसकी अनुमति से लगे हैं।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से यह जानकारी भी नहीं दी गई है कि प्रशासन ने किसकी अनुमति दी थी और किसकी नहीं दी थी। इससे साफ है कि मंदिर व मस्जिदों पर लाउडस्पीकर लगे होने की परिस्थितियां एक है।
ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि एक जैसी परिस्थिति के बावजूद सिर्फ शिव मंदिर से ही लाउडस्पीकर क्यों हटाया गया? वाजपेयी ने कहा कि यह गंभीर प्रकरण है।