2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर जीती प्रयागराज की पूजा पाल को भी पार्टी में उपाध्यक्ष बनाकर राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा के पक्ष में मतदान करने का इनाम दिया गया है। पार्टी के हिंदुत्व चेहरे के तौर पर चर्चित और प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष समेत कई महत्वपूर्ण पद पर रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा को लंबे अंतराल बाद प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर फिर से मुख्यधारा में वापस लाया गया गया है। माना जा रहा है राणा को पश्चिम बंगाल के चुनाव में काम का इनाम दिया गया है।
33 प्रतिशत हिस्सेदारी से वंचित रहीं महिलाएं : भाजपा के महिलाओं को 33 प्रतिशत हिस्सेदारी देने के संकल्प को देखते हुए पंकज चौधरी की नई टीम में महिलाएं भी अपेक्षा के अनुसार हिस्सेदारी पाने में पीछे रह गईं। टीम में सिर्फ 12 महिलाओं को ही जगह मिल सकी है जबकि 33 प्रतिशत की कसौटी पर इन्हें 16 स्थान मिलने चाहिए थे।
लखनऊ-बाराबंकी को मिली तरजीह
लखनऊ और बाराबंकी जैसे कुछ जिलों से एक से ज्यादा पदाधिकारी बनाए गए हैं। कुछ जिले प्रतिनिधित्व पाने से वंचित रहे हैं। यही नहीं, बाराबंकी से एक ही जाति रावत (पासी) से प्रियंका रावत को उपाध्यक्ष तथा उपेंद्र रावत को महामंत्री बनाना बताता है कि पदाधिकारियों के चयन में संतुलन से ज्यादा पार्टी के प्रभावशाली नेताओं के बीच सामंजस्य और समन्वय तथा समझौते की चली है। बाराबंकी से ही अवधेश श्रीवास्तव को प्रदेश मंत्री बनाकर इस जिले को तीन पदाधिकारी दिए गए हैं।
उपेंद्र रावत लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। एक महिला के साथ विवादित वीडियो वायरल होने के बाद लोकसभा के 2024 के चुनाव में इनका टिकट काट दिया गया था। हालांकि फोरेंसिक जांच में वीडियो में उपेंद्र की आवाज की पुष्टि नहीं हो पाई। इन्हें प्रदेश महामंत्री बनाना चौंकाने वाला रहा।