बालिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, आजमगढ़, फतेहपुर, उन्नाव, लखीमपुर, भदोही, कौशांबी, महोबा समेत कई ऐसे जिले हैं जहां पर भाजपा को विपक्ष के साथ ही अपने लोगों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों की माने तो इन जिलों में सुभासपा, आप समेत अन्य छोटे दलों के नाम पर चुनाव लड़कर जीतने वाले सदस्यों की संख्या 4 से 11 तक है।
माना जा रहा है कि पूर्वांचल के आधे दर्जन जिलों में सुभासपा सदस्यों की संख्या किसी भी उम्मीदवार को जिताने में निर्णायक साबित हो सकती है। सुभासपा भाजपा के खिलाफ है। सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने तो एलान भी कर रखा है कि उनकी पार्टी और उनके द्वारा गठित भागीदारी संकल्प मोर्चा से जुड़े दलों के समर्थित सदस्य भाजपा को हराने के लिए सपा का साथ देंगे।
आम आदमी पार्टी ने भी जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव न लड़ने की घोषणा करने के साथ ही भाजपा का विरोध करने का एलान कर रखा है। ऐसे में सपा भी इसी रणनीति पर काम कर रही है कि सुभासपा समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ ही नाराज भाजपाइयों को साध कर पासा पलट दिया जाए।