जानकारी के मुताबिक, संगम पर आरती करने के साथ शाह लेटे हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके अलावा किले का भ्रमण करेंगे। इसके बाद वे बाघम्बरी मठ जाकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से मिलेंगे। अन्य कई संतों से भी शाह की बातचीत होगी। वे कुंभ की तैयारियों की जानकारी लेने के साथ संतों की तरफ से संगम तट पर स्थायी निर्माण के बारे में संभावनाएं टटोलेंगे।
संत-महात्मा अयोध्या में जल्द से जल्द राम मंदिर निर्माण की मांग कई बार उठा चुके हैं। कुंभ तक अविरल और निर्मल गंगा की मांग पर भी संत मुखर हैं। अखाड़ा परिषद फर्जी संतों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश में कुछ संतों को राज्यमंत्री का दर्जा देने पर भी संत नाराजगी जता चुके हैं। इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयाग करने की मांग भी उठ रही है।
संत देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ ही संस्कृत स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती, संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा की मांग भी उठा चुके हैं। ऐसा लगता है कि शाह ने इसी सबको देखते हुए प्रधानमंत्री के 28 जुलाई को लखनऊ आगमन की पूर्व संध्या पर प्रयाग पहुंचकर संतों से संवाद का फैसला किया है। राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो शाह का प्रयाग दौरा लोकसभा चुनाव के मद्देनजर संतों को साधने की रणनीति का भी हिस्सा है।