2018 के राज्यसभा चुनाव में नितिन अग्रवाल ने भाजपा के उम्मीदवार के समर्थन में मतदान किया था। लोकसभा में भी उन्होंने भाजपा का समर्थन किया था।
14 वर्ष बाद 18वां उपाध्यक्ष चुनने की तैयारी
18 अक्तूबर को यूपी विधानसभा के इतिहास में 18वें उपाध्यक्ष का चुनाव कराने की तैयारी है। 31 जुलाई 1937 को अब्दुल हकीम पहले उपाध्यक्ष बने थे। फिर नफीसुल हसन, हरगोविंद पंत, रामनारायण त्रिपाठी, होतीलाल अग्रवाल, श्रीपति मिश्र, वासुदेव, शिवनाथ सिंह कुशवाहा, जगन्नाथ प्रसाद, यादवेंद्र सिंह उर्फ लल्लन जी, हुकुम सिंह, त्रिलोक चंद्र, सुरेन्द्र सिंह चौहान, राम आसरे वर्मा, डॉ. अम्मार रिजवी, डॉ. वकार अहमद शाह और 17वें विधानसभा उपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल (30 जुलाई 2004 से 13 मई 2007 तक) रहे।
नितिन की दलबदल याचिका खारिज
विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने गत दिनों सपा विधायक नितिन अग्रवाल के खिलाफ पेश दलबदल याचिका भी खारिज कर दी थी। सूत्रों के अनुसार, यह बदली हुई रणनीति के तहत ही किया गया था।
नरेश अग्रवाल प्रदेश में वैश्य समाज के कद्दावर नेता माने जाते हैं। पूर्व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल को योगी मंत्रिमंडल से हटाकर पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में नितिन को उपाध्यक्ष बनाने से वैश्य वर्ग में अच्छा संदेश तो जाएगा ही, पार्टी को वैश्य वर्ग में युवा चेहरा भी मिलेगा।
विधानसभा सत्र 18 को
विधानसभा का तृतीय सत्र 18 अक्तूबर को आहूत किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने सुबह 11 बजे सत्र आयोजित करने का आह्वान पत्र जारी किया है। एजेंडा सुनिश्चित करने के लिए कार्यमंत्रणा समिति की बैठक जल्द बुलाई जाएगी।