भले ही भाजपा को यूपी में गठबंधन में शामिल साथियों के साथ विधानसभा की 403 सीटों में से 325 पर जीत मिल गई हो लेकिन पार्टी के रणनीतिकार फिलहाल हाथ पर हाथ रखकर बैठने को तैयार नहीं हैं।
उन्होंने जीत का खुमार एक तरफ रखते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं, विधायकों व सांसदों को काम में जुटाने का फैसला किया है। इसके तहत भाजपा के स्थापना दिवस 6 अप्रैल से डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती 14 अप्रैल तक विशेष अभियान चलाने की योजना बनी है। इसे ‘गरीब उत्थान कार्यक्रम’ नाम दिया गया है।
अंबेडकर के सहारे दलितों व पिछड़ों को जोड़े रखने की रणनीति बनी है तो गरीबों के साथ अगड़ों को जोड़े रखने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। चिंता लोकसभा चुनाव 2019 में 2014 की तुलना में और बेहतर प्रदर्शन के साथ ही सांसदों के जनता से संवाद व संपर्क को फोकस करने की भी है।
शायद यही वजह है कि सांसदों को पार्टी द्वारा तय किसी दूसरे संसदीय क्षेत्र में कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें व सम्मेलन करने की जिम्मेदारी देने की योजना है। इसमें सांसदों को उस क्षेत्र में रात भी गुजारनी होगी।
इस दौरान सांसद जहां विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के लिए कार्यकर्ताओं व जनता का आभार जताएंगे, वहीं केंद्र सरकार द्वारा दलितों, पिछड़ों व गरीबों के कल्याण के लिए शुरू किए गए कामकाज की भी जानकारी देंगे।
भीम एप के उपयोग की है तैयारी
अभियान के तहत तय कार्यक्रमों में वोटों के समीकरण दुरुस्त करने के संकेत साफ नजर आ रहे हैं। उदाहरण के लिए भीम एप के प्रचार-प्रसार के साथ इसके लिए लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य भी तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
याद रहे कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने भीम एप को लेकर भाजपा पर निशाना साधा था। जवाब में भाजपा ने यह कहते हुए हमला बोला था कि कुछ लोग डॉ. भीमराव अंबेडकर को जेबी महापुरुष बनाकर रखना चाहते हैं जबकि भाजपा डॉ. अंबेडकर के आदर्शों की राह पर चलकर दलितों व गरीबों का कल्याण करना चाहती है। शायद यही वजह है कि भाजपा ने इस अभियान में भीम एप के उपयोग की जानकारी देने का काम भी जोड़ा है।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ता लोगों को बताएंगे कि केंद्र सरकार ने इस एप का नाम डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर इसलिए रखा क्योंकि अंबेडकर ने देश को सिर्फ संविधान ही नहीं बल्कि आर्थिक ढांचे का ज्ञान भी दिया। बसपा भले ही डॉ. अंबेडकर के नाम का इस्तेमाल करती हो लेकिन उसने या किसी अन्य दल ने डॉ. अंबेडकर को सम्मान देने के लिए कुछ नहीं किया।
वहीं, भाजपा डॉ. अंबेडकर सहित दलितों व पिछड़ों की भलाई के लिए काम करने वाले सभी महापुरुषों के प्रति सम्मान जताने के लिए इस तरह के कदम उठा रही है। यह भी बताया जाएगा कि इस एप के जरिये गरीब किस तरह योजनाओं का लाभ उठा सकता है।
सम्मेलन के लिए ये है रणनीति
अभियान के तहत शक्ति केंद्रों (लगभग न्याय पंचायत स्तर) पर कार्यकर्ताओं के सम्मेलन होंगे। रणनीतिकारों को शायद आशंका है कि सूबे में भाजपा के संगठनात्मक कार्यक्रमों पर सत्ता का रंग हावी हो सकता है, इसीलिए हिदायत दी गई है कि सम्मेलन सादगीपूर्ण रहें।
इनमें केंद्र सरकार की उपलब्धियों के साथ विधानसभा चुनाव में जीत और आगे की चुनौतियों पर भी चर्चा हो।
साथ ही कार्यकर्ताओं को समझाया जाएगा कि प्रदेश व केंद्र दोनों जगह सरकार होने का लाभ उठाते हुए किस तरह भविष्य के समीकरणों को दुरुस्त किया जा सकता है।
हारी सीटों पर जीत के लिए अभी से तैयार हो रही योजना
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह
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रणनीतिकारों ने लोकसभा चुनाव में हारी सीटों पर अभी से ध्यान देने की रणनीति बनाई है। इन सीटों पर पार्टी के वरिष्ठ सांसदों व मंत्रियों को भेजा जाएगा और वहां की पूरी स्थिति समझकर 2019 का चुनाव जीतने की रणनीति बनाई जाएगी।
यही नहीं, जिन सीटों पर पार्टी ने 2014 में जीत हासिल की थी, वहां के सियासी समीकरण, सांसदों के सरोकार और वहां के लोगों से संपर्क की थाह भी लेने की योजना बनी है। इस सिलसिले में 29 मार्च को लखनऊ में भाजपा के पदाधिकारियों की बैठक भी प्रस्तावित है।
इस बारे में पार्टी महामंत्री विजय बहादुर पाठक से पूछे जाने पर उन्होंने बैठक की पुष्टि करते हुए इसे पार्टी की सामान्य गतिविधियों का हिस्सा बताया। उनका कहना था किसी विशेष प्रयोजन के लिए बैठक होने की उन्हें जानकारी नहीं है।