आखिरकार यूपी भाजपा मोदी के मास्टर प्लान पर चर्चा के लिए तैयार हो गई है। ये वो प्लान है जिस पर अभी तक भाजपाइयों ने चर्चा की जहमत नहीं उठाई।
जी हां, मोदी के मास्टर प्लान से सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाली भाजपा अब अपने जीत के कारणों पर समीक्षा करेगी। हालांकि भाजपा को चुनाव नतीजे घोषित होने के दो महीने बाद इनकी समीक्षा करने की सुध आई है।
इसके लिए 16 जुलाई को यहां पार्टी मुख्यालय पर पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। बैठक में लोकसभा परिणामों की समीक्षा के साथ-साथ प्रदेश में विधानसभा की 12 सीटों और लोकसभा की एक मैनपुरी सीट के उपचुनाव की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
आमतौर पर भाजपा में चुनाव परिणाम आने के बाद उन पर पहले पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में और फिर राज्य कार्यकारिणी की बैठक में समीक्षा करने की परंपरा रही है।
समीक्षा के आधार पर योजना
इस समीक्षा से निकले निष्कर्ष पर भाजपा अपनी कार्ययोजना तैयार करती रही है। इस बार लोकसभा की 80 में 73 सीटें जीतने खुमारी हो या अन्य कोई वजह।
भाजपा नेताओं ने नतीजों की समीक्षा के लिए पदाधिकारियों को भी बैठक बुलाने की जरूरत नहीं समझी। राज्य कार्यकारिणी की बैठक भी काफी दिनों से नहीं हो पाई है।
पार्टी संविधान के मुताबिक, राज्य कार्यकारिणी की बैठक प्रत्येक तीन महीने में एक बार होनी चाहिए। लेकिन एक वर्ष से ऊपर हो गया, पर राज्य कार्यकारिणी की बैठक नहीं हो पाई।
सिर्फ औपचारिकता ही बनकर रह गईं बैठकें
चुनाव नतीजे 16 मई को घोषित हुए थे। तब से 16 जुलाई तक ठीक दो महीने हो जाएंगे। अब बैठक बुलाई गई है। वैसे चुनाव से पहले भी पदाधिकारियों की बैठक नहीं हुई थी।
कहने को भाजपा नेता तर्क दे सकते हैं कि बीच में एक-दो बार पदाधिकारियों की बैठक हुई। पर, वास्तव में इन बैठकों का कोई मतलब ही नहीं था।
कारण, भाजपा की तरफ से ही हर बैठक को लेकर कहा गया कि उपलब्ध पदाधिकारियों की बैठक।
ऐसे में उन बैठकों का कोई मतलब नहीं था।
इसलिए शुरू हुई सक्रियता
माना जाता है कि पदाधिकारियों की बैठक के पीछे भाजपा में हुआ बदलाव है। नवनियुक्त प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल की पहल पर यह बैठक बुलाई गई है।
दरअसल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बंसल को विधानसभा चुनाव में भी लोकसभा के चुनाव जैसा प्रदर्शन दोहराने की तैयारी करने का एजेंडा देकर यूपी भेजा है। यही वजह है कि बंसल ने आते ही क्षेत्रीय बैठकें शुरू कर दी हैं।
वह इन बैठकों के जरिये जमीनी कार्यकर्ताओं से संपर्क भी कर लेना चाहते हैं और भारी जीत के बाद कार्यकर्ताओं की मन:स्थिति और जनता के मूड का अंदाज लगा लेना चाहते हैं।
वह इस बात की भी थाह लेना चाहते हैं कि मोदी की सरकार बनने के बाद स्थानीय स्तर पर आम लोगों के दिमाग में क्या कुछ चल रहा है। ताकि उसी आधार पर भाजपा की आगामी कार्ययोजना बनाई जा सके।