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मथुरा में बवाल करने वालों को था शिवपाल का संरक्षण: भाजपा

Fri, 03 Jun 2016 11:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य - फोटो : amar ujala
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मथुरा में अवैध कब्जा हटाने को लेकर हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत दो दर्जन लोगों की मौत पर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर जमकर हल्ला बोला है।
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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने सीधे तौर पर वरिष्ठ मंत्री व सपा के प्रदेश प्रभारी शिवपाल यादव को निशाने पर लिया। कहा कि अवैध कब्जा करने वालों को उनका संरक्षण प्राप्त था।

वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रदेश सरकार से इस्तीफे की मांग करते हुए घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

केशव प्रसाद मौर्य ने काबीना मंत्री शिवपाल यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा है कि अफसरों का कत्ल कर देने वाले कथित सत्याग्रहियों को प्रदेश के ताकतवर मंत्री और सीएम के चाचा शिवपाल का संरक्षण था। कथित सत्याग्रह और आंदोलन की अगुवाई करने वाला रामवृक्ष भू-माफिया है। मुख्यमंत्री भी सब सच जानते हैं।
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घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की

- फोटो : amar ujala
मौर्य ने कहा, उन्हें जनता के सामने सच रखते हुए संरक्षण देने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की और कहा कि घटना के विरोध में भाजपा कार्यकर्ता 5 जून को प्रदेश भर में प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने घटना में शहीद पुलिस वालों के परिवारीजनों को एक करोड़ रुपये और अन्य पीड़ित परिवारों को भी आर्थिक सहायता की मांग की। मौर्य ने कहा कि जांच पड़ताल की आवश्यकता तो वहां पड़ती है जहां घटना के बारे में और उसके जिम्मेदार लोगों के बारे में किसी को पता ना हो। जवाहरबाग पर कब्जा किन लोगों का था?

कौन लोग ऐसे तत्वों को संरक्षण देकर पाल रहे थे? यह बात तो मथुरा के स्थानीय प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा जन-जन को मालूम है। इस बीच, पार्टी विधानमंडल दल नेता सुरेश खन्ना ने भी सरकार से इस्तीफा मांगते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।

इस्तीफा दे सरकार, न्यायिक जांच कराई जाए : मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती ने मथुरा में हुए खूनी संघर्ष को सूबे में जंगलराज की मिसाल बताते हुए सपा सरकार से इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। बसपा अध्यक्ष ने बयान जारी कर कहा कि मथुरा में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हटवाने में खूनी संघर्ष के दौरान एक एसपी व एक थानेदार की मौत साबित करती है कि सपा राज में पुलिस भी अपनी जिम्मेदारी निभाने में असहाय है।

सपा सरकार ने पिछले दो साल से वहां अवैध कब्जा होने दिया और कब्जाधारियों को इस हद तक छूट दी गई कि वे अवैध हथियार भी वहां जमा करते गए। इसी वजह से मथुरा के एसपी व एसओ को अपनी जान गंवानी पड़ी।

मायावती ने सवाल किया है कि क्या इन अफसरों के परिवार को अनुग्रह राशि देकर परिवार व पुलिस फोर्स के टूटे मनोबल की क्षतिपूर्ति की जा सकती है?

मायावती ने कहा है कि अवैध कब्जाधारियों को सपा का संरक्षण प्राप्त था और वह उनका इस्तेमाल अपने राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति में करना चाहती थी। इसकी गहन जांच होनी चाहिए।
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हाईकोर्ट के जज से कराई जाए जांच : कांग्रेस

कांग्रेस ने मथुरा की घटना के लिए सरकारी मशीनरी को जिम्मेदार ठहराते हुए इसकी जांच हाईकोर्ट के कार्यरत न्यायाधीश से कराने की मांग की है।

प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन सत्यदेव त्रिपाठी ने कहा कि जब-जब प्रदेश में सपा सरकार आती है, कानून-व्यवस्था के साथ इसी तरह का खिलवाड़ होता है।

सरकार की इससे बड़ी अक्षमता क्या होगी कि वहां हथियार जुटाए गए, माइंस बिछाई गईं और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं हुई। यह बेहद गंभीर मामला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री भी मथुरा गए हैं।
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