भाजपा ने पोस्टल बैलेट वाले मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए पार्षदों, ग्राम प्रधानों के साथ क्षेत्र के प्रमुख लोगों को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में औसतन 25 से 30 हजार बुजुर्ग मतदाता हैं।
यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा पोस्टल बैलेट वाले मतदाताओं को साधने में जुटी है। इसके तहत ही कर्मचारियों-अधिकारियों के साथ 80 वर्ष से अधिक आयु, दिव्यांग और कोरोना संक्रमित मतदाताओं से संपर्क बढ़ाया गया है।
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निर्वाचन आयोग ने 80 वर्ष से अधिक आयु वाले, दिव्यांग और कोरोना संक्रमित मतदाताओं को भी पोस्टल बैलेट से मतदान की छूट दी है। प्रदेश में 5 जनवरी को जारी मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के आधार पर 80 वर्ष से अधिक आयु के 24,03,296 और 10,64,266 दिव्यांग मतदाता है।
प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 80 वर्ष से अधिक वाले औसतन 5 से 6 हजार हैं। मौजूदा स्थिति में 95 हजार से अधिक संक्रमित वोटर हैं। इनका वोट पाने के लिए पार्टी ने बूथ अध्यक्ष के साथ स्थानीय पार्षद, ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य, जिला पंचायत सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं क्षेत्र में पार्टी के प्रभावशाली नेताओं से भी मदद ली जाएगी। पार्टी का मानना है कि यह मतदाता वोट प्रतिशत बढ़ाने में निर्णायक साबित हो सकते हैं। इसलिए कार्यकर्ता पोस्टल बैलेट जारी कराने से लेकर उनका गुप्त मतदान कराकर पोस्ट कराने तक में मदद करेंगे।
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2017 व 2019 में पोस्टल बैलेट में जीती थी भाजपा
विधानसभा 2017 और लोकसभा चुनाव 2019 में कर्मचारियों-अधिकारियों, सैनिकों, अद्धसैनिक बलों के जवानों से मिले पोस्टल बैलेट में 70 फीसदी से अधिक वोट भाजपा को मिले थे। 2022 में भी भाजपा ने जीत के इस अंतर को बरकरार रखने के लिए रणनीति तैयार की है।