प्रदेश में जाट आबादी लगभग 6 प्रतिशत है। पर, पश्चिम के मथुरा जैसे कई जिलों में इनकी आबादी का प्रतिशत 24 तक है। इसकी वजह से लोकसभा और विधानसभा की सीटों पर जाट वोट निर्णायक हो जाता है। जाटों के बीच राजा महेंद्र प्रताप सिंह से भावनात्मक लगाव को सिर्फ इसी से जाना जा सकता है कि उन्हें सर्व सम्मति से अखिल भारतीय जाट महासभा का अध्यक्ष चुना गया था।
उनकी लोकप्रियता का एक उदाहरण 1957 का लोकसभा चुनाव है जब उन्होंने मथुरा में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार अपने खिलाफ चुनाव लड़ रहे हर व्यक्ति की जमानत जब्त करा दी थी। उनसे पराजित होने वालों में अटल बिहारी वाजपेयी भी थे। जाहिर है कि मोदी ने अलीगढ़ में पूर्ववर्ती सरकारों पर महापुरुषों को भुला देने और 20वीं सदीं की गलतियों को 21वीं सदीं में दुरुस्त करने के बहाने जाटों को यह संदेश देने की कोशिश की उनके सरोकारों व भावनाओं का सम्मान भाजपा की सरकारें ही कर सकती हैं।
वायदों पर अमल का इरादा
यही नहीं, अलीगढ़ के जरिये प्रधानमंत्री ने यह भी संदेश दिया कि केंद्र और प्रदेश की योगी सरकार सिर्फ वादा नहीं करती बल्कि उन्हें पूरा करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2019 में अलीगढ़ दौरे के दौरान राजा महेंद्र प्रताप सिंह की अनदेखी को मुद्दा बनाते हुए उनके नाम पर एक विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की थी। उन्होंने यह घोषणा चुनावी परिदृश्य के मद्देनजर जाटों की नाराजगी दूर करने के लिए ही की थी लेकिन इसके पीछे कहीं न कहीं हिंदुत्व का मुद्दा भी छिपा था।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के निर्माण में राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने भी काफी योगदान दिया था। उन्होंने इस विश्वविद्यालय को जमीन भी दी थी। भाजपा कार्यकर्ता काफी समय से एएमयू में उनके योगदान का उल्लेख लिखने और विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर करने की मांग कर रहे थे। साथ ही एएमयू पर योगदान की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे थे।
जिन्ना की तस्वीरों को लेकर राजनीतिक सुर्खियों में चल रहे एएमयू पर भाजपा के हमलों के बीच राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय का शिलान्यास करके भाजपा सरकार ने संकेतों में ही सही लेकिन हिंदुत्व के समीकरणों पर भी सियासी गणित साधने का संकेत दिया है। इसका कुछ न कुछ लाभ भाजपा को जरूर मिलेगा। महाराजा सूरजमल इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष इंजीनियर कप्तान सिंह कहते भी हैं, ‘कम से कम राजा महेंद्र प्रताप सिंह के योगदान को कुछ तो पहचान मिली। वैसे हम लोग (जाट समाज) तो उन्हें भारतरत्न की सरकार से मांग कर रहे हैं।’
इनके भी हैं मायने
प्रधानमंत्री ने अलीगढ़ से सिर्फ जाटों को सियासी संदेश देने की कोशिश नहीं की बल्कि भाषण के शुरुआत में ही कल्याण सिंह का नाम लेकर पिछड़ों को भी राजनीतिक संदेश दिया, कि भाजपा के लिए कल्याण कभी अप्रासंगिक नहीं होंगे। साथ ही राजा महेंद्र प्रताप सिंह और कल्याण के जरिये पश्चिम के किसानों को भी साधने की कोशिश की। तभी तो उन्होंने अलीगढ़ में न सिर्फ किसानों के लिए किए जा रहे काम गिनाए बल्कि अलीगढ़ के योगदान को घरों की सुरक्षा से अब सीमाओं की रक्षा तक बढ़ाने की बात कहते हुए पश्चिम के किसानों को यह बताने का प्रयास किया कि वे उनके सरोकार, सम्मान, स्वाभिमान का ही नहीं बल्कि उनके घरों के नौजवानों के रोजगार का भी इंतजाम कर रहे हैं।