भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र नागर को दोबारा राज्यसभा का टिकट दिया गया है। नागर बतौर उपाध्यक्ष पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय रहे, वहीं विधानसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी में गुर्जर वोट बैंक को भाजपा के पक्ष में लामबंद करने में अहम भूमिका निभाई थी।
गोरखपुर से दो राज्यसभा उम्मीदवार
भाजपा ने गोरखपुर जिले से दो कार्यकर्ताओं को राज्यसभा का टिकट दिया है। राधामोहन दास अग्रवाल और संगीता यादव दोनों गोरखपुर के हैं। लोकसभा सदस्य रविकिशन सहित गोरखपुर में अब कुल तीन सांसद हो जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से ही विधायक हैं। ऐसे में अब यूपी से दिल्ली तक भाजपा की राजनीति में गोरखपुर का दबदबा बढ़ेगा।
पिछड़ों पर फोकस बरकरार
राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा ने पिछड़े वर्ग को साधने का प्रयास किया है। छह में से तीन टिकट पिछड़ी जाति के नेताओं को दिए है। वहीं परंपरागत ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ग को भी एक-एक सीट दी है। यादव समाज से संगीता यादव, निषाद समाज से बाबूराम निषाद और गुर्जर समाज से सुरेंद्र नागर को उम्मीदवार बनाया है। ब्राह्मण समाज से लक्ष्मीकांत वाजपेयी, वैश्य समाज से राधामोहन दास अग्रवाल और ठाकुर समाज से दर्शना सिंह को टिकट दिया है।
वाजपेयी का छह साल का इंतजार खत्म
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी अप्रैल 2016 में अध्यक्ष पद से हटाए गए थे। उसके बाद 2017 में वे मेरठ शहर सीट से विधानसभा चुनाव हार गए थे। 2017 के बाद से विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव के हर चुनाव में टिकट की दौड़ में वाजपेयी का नाम चला, लेकिन अंत में उन्हें मायूसी ही हाथ लगती थी। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें दूसरे दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल कराने की कमान सौंपी थी। वाजपेयी ने सपा के सात एमएलसी सहित बसपा और कांग्रेस के नेताओं को बड़ी संख्या में पार्टी में शामिल कराया था। अभियान की सफलता का सेहरा भी वाजपेयी के सिर बंधा। करीब छह वर्ष से अधिक समय के इंतजार के बाद पार्टी ने इस बार उन्हें राज्यसभा भेजा है। वाजपेयी को राज्यसभा का टिकट मिलने से पश्चिमी यूपी में पार्टी ने ब्राह्मण वोट बैंक को साधा गया है।