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BJP Candidate List 2022 Ayodhya : पुराने चेहरों पर फिर से कमल खिलाने की चुनौती, पांचों सीटों पर घोषित किए प्रत्याशी

Fri, 28 Jan 2022 05:48 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

अयोध्या में पांचवे चरण में 27 फरवरी को चुनाव होना है। भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को जिले की सभी पांचों विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा में रही अयोध्या विधानसभा सीट पर कई नेताओं ने अपनी दावेदारी की थी।
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अयोध्या - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को अयोध्या जिले के सभी पांच विधानसभा सीटों पर भाजपा ने प्रत्याशी का एलान कर दिया है। भाजपा ने जिले के तीन सीटों पर पुराने चेहरों पर ही भरोसा जताया है तो दो सीटों पर केवल चेहरे बदलकर बेटे और पत्नी को टिकट दिया गया है। ऐसे में एक बार फिर से पुराने चेहरों पर ही कमल खिलाने की चुनौती होगी।

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जिले में पांचवे चरण में 27 फरवरी को चुनाव होना है। भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को जिले की सभी पांचों विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा में रही अयोध्या विधानसभा सीट पर कई नेताओं ने अपनी दावेदारी की थी। कुछ दिन पहले तक सीएम योगी के यहां से चुनाव लड़ने की अटकलें थी, इसकी तैयारी भी शुरू कर दी गई थी। इस बीच पार्टी ने उन्हें गोरखपुर सदर से प्रत्याशी बना दिया तो इस सीट पर प्रत्याशी कौन होगा इसको लेकर सियासी चर्चा छिड़ गई। इस सीट के लिए वर्तमान विधायक वेदप्रकाश गुप्ता सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। हुआ भी यही अयोध्या विधानसभा में एक बार फिर से पार्टी ने वेदप्रकाश गुप्ता पर ही भरोसा जताया है। 2017 के चुनाव में भाजपा के भरोसे पर खरा उतरते हुए वेदप्रकाश गुप्ता ने समाजवादी पार्टी के तेजनारायण पांडेय को हराकर सपा से यह सीट छीनकर फिर से भाजपा के खाते में डाल दी थी।

अब चूंकि अयोध्या में रामंमदिर निर्माण कार्य भी चल रहा है और तमाम विकास योजनाएं अयोध्या की बदलती तस्वीर की गवाही दे रही हैं, ऐसे में इस सीट पर दोबारा कमल खिलाने की चुनौती वेदप्रकाश गुप्ता के सामने होगी। इसी तरह पार्टी ने रूदौली सीट से लगातार दो बार से विधायक रामचंद्र यादव को पुन: मैदान में उतारा है। मिल्कीपुर सुरक्षित सीट पर भी इस बार विधायक रहे बाबा गोरखनाथ को ही प्रत्याशी बनाया गया है। बीकापुर सीट पर प्रत्याशी बदलने की चर्चा के बीच पार्टी ने विधायक शोभा सिंह चौहान की जगह इस बार उनके पुत्र डॉ. अमित सिंह चौहान पर दांव खेला है। 2017 के चुनाव में मुन्ना सिंह चौहान की पत्नी शोभा सिंह चौहान को भाजपा ने टिकट दिया था और उन्हें विजय मिली थी। इस बार अपनी मां की विरासत को आगे बढ़ाने का जिम्मा डॉ.अमित सिंह पर है।
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खब्बू तिवारी की पत्नी मैदान में
गोसाईगंज सीट को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इस सीट पर विधायक रहे इंद्रप्रताप तिवारी खब्बू फर्जी मार्कशीट के एक मामले में करीब दो माह से जेल में निरूद्ध हैं। ऐसे में इस सीट पर पार्टी किसे प्रत्याशी बनाएगी इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गरम रहा। इस सीट पर भी कई दावेदार सामने आ रहे थे,  आखिरकार पार्टी ने खब्बू तिवारी की पत्नी आरती तिवारी को चुनाव मैदान में उतारकर सभी कयासों पर विराम लगा दिया। आरती तिवारी के प्रत्याशी बनने पर खब्बू के समर्थकों श्यामजी दूबे, पवन तिवारी आदि ने शुक्रवार को मिठाई बांटकर हर्ष व्यक्त किया।

प्रत्याशी बोले- जीतने के बाद विकास कार्य को बढ़ाएंगें आगे
अयोध्या विधानसभा सीट पर प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद वेदप्रकाश गुप्ता ने संगठन का आभार जताते हुए कहा कि जनता उन्हें मौके देती है तो विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगे। अयोध्या को विश्वस्तरीय पयर्टन नगरी बनाने की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ेगा। रूदौली के प्रत्याशी रामचंद्र यादव ने कहा कि किसान, नौजवान के हित में जो होगा वह काम किया जाएगा, क्षेत्र के विकास को गति देना हमारी प्राथमिकता होगी। संगठन ने जो भरोसा जताया है उस पर खरा उतरने का पूरा प्रयास होगा। मिल्कीपुर के प्रत्याशी बाबा गोरखनाथ ने कहा कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है वह इस भरोसे पर खरे उतरने की कोशिश करेंगें। जनता ने यदि दोबारा मौका दिया तो क्षेत्र में जो विकास के काम अधूरे रह गए हैं, उनको पूरा कराया जाएगा, विकास की नई इबारत लिखेंगे। गोसाईगंज से पहली बार चुनाव मैदान में उतर रहीं आरती तिवारी ने पार्टी को धन्यवाद देेते हुए कहा कि यदि विजय मिली तो क्षेत्र का चहुंमुखी विकास प्रतिबद्धता होगा। समाज के निचले तबके तक योजनाओं का लाभ पहुुंचे ऐसी कोशिश रहेगी। चिकित्सक के पेश को छोड़कर राजनीति में उतरे बीकापुर से प्रत्याशी बनाए गए डॉ. अमित सिंह अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने को बेकरार हैं। कहा कि मौका देने पर संगठन का आभार जताया और जनता से अपील किया कि उन्हें एक मौका दिया जाए क्षेत्र में विकास की नई परिभाषा गढ़ी जाएगी।

अपना दल को नहीं मिली एक भी सीट
जिले में भाजपा के सहयोगी दल अपना दल को एक भी सीट नहीं मिली है। कुछ दिनों पूर्व चर्चा थी कि जिले की दो विधानसभा सीटों पर अपना दल अपने प्रत्याशी उतारने का भाजपा पर दवाब बना रही है। अपना  दल के जिलाध्यक्ष ने इसकी पुष्टि भी की थी। गोसाईगंज व बीकापुर सीट पर अपना दल अपने दावेदारी कर रहा था। हालांकि शुक्रवार को पांचों विधानसभा सीटों पर भाजपा ने प्रत्याशी उतारकर सभी अटकलों पर विराम लगा दिया।

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सिंबल न गठबंधन, सभी प्रत्याशी भाजपा के

वीआईपी जिले में चुनाव के लिए न सिंबल की और न ही गठबंधन की सियासत चली। सभी पांच विधानसभा क्षेत्रों के लिए सभी पांच सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी उतार दिए गए। यहां भाजपा अपने दम पर विपक्ष से टक्कर लेने के लिए तैयार हो गई है। अयोध्या सियासी ऊर्जा भूमि  कही जाती है। यह पूरे प्रदेश नहीं पूरे देश की सियासत का रूख बदलने की क्षमता रखती है। अतीत में ऐसा हुआ भी है। शायद यही कारण है कि भाजपा ने यहां अपने दम-खम पर मैदान में उतरने के लिए प्रत्याशियों की घोषणा की है। प्रत्याशी घोषित होने के पहले तक इस बात को लेकर सियासत में असमंजस की स्थिति रही कि अयोध्या की दो सीटे सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जा सकती हैं ऐसा होने के पीछे सशक्त तर्क भी था।

2017 के चुनाव में गठबंधन और सिंबल की सियासत यहां हो चुकी है। गोसाईंगंज से चुनाव मैदान में उतारे गए इंद्र प्रताप तिवारी उतरे तो थे अपना दल के खाते से लेकिन सिंबल उन्हें भाजपा का मिला था। इसलिए सियासी पंडित गोसाईंगंज विधानसभा क्षेत्र को अपना दल के कोटे की सीट मानकर चल रहे थे। इसको हवा तब और मिल गई जब अपना दल के जिलाध्यक्ष केडी वर्मा ने जिले की दो सीटों गोसाईंगंज और बीकापुर पर दावा ठोंकने की बात कही। दूसरी ओर बीकापुर विधानसभा सीट पर भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के एक दावेदार से दावा किया जा रहा था। सियासी हल्के में बीकापुर से एक पूर्व विधायक का नाम प्रत्याशी बनने को लेकर जोरों पर था। वाल राइटिंग के साथ ही पूर्व विधायक के समर्थक प्रचार में जुट गए थे लेकिन भाजपा से अयोध्या के पांचों सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित होने के बाद पूरी की पूरी तस्वीर बदल गई। सभी सीटों पर भाजपा ने अपने प्रत्याशी उतार दिए। प्रत्याशी की घोषणा के बाद दूसरे दलों के सियासी गुब्बारे की हवा फुस्स हो गई और राजनीति में मुहावरा चल निकला, सिंबल न गठबंधन सभी प्रत्याशी भाजपा के।

सत्तादल से प्रत्याशी की घोषणा के बाद आम लोग भी चर्चा में भाग लेने लगे हैं। शहर के रहने वाले बृजेश कुमार पाठक कहते हैं कि यह अयोध्या है, भाजपा को संजीवनी यहीं से मिलती है, गठबंधन या सिंबल की मर्यादा अपनी जगह है लेकिन वह अपने प्रत्याशी पर ही दांव लगाना चाहती है। गठबंधन के दलों को निर्धारित सीटें कहीं अलग मिली होंगी।

सोहावल के रहने वाले पार्थ कहते हैं कि पिछले चुनाव में भी गोसाईंगंज से प्रत्याशी भले ही दूसरे दल के कोटे से था लेकिन सिंबल तो भाजपा ने अपना ही दिया था। यह अयोध्या के कारण ही हुआ। ऐसा मेरा मानना है।
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